जी20 शेरपा और नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत. फोटो- एएनआई
G-20 शेरपा और नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत के अनुसार, भारत ने पिछले कुछ वर्षों में एक मजबूत और विविध दृष्टिकोण के साथ अपनी अर्थव्यवस्था को नया आकार दिया है, जिसे अनेक सुधारों, डिजिटल नवाचार, हरित पहलों और मजबूत बुनियादी ढांचे द्वारा बढ़ावा मिला है. भारतीय आर्थिक मॉडल अब वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभर रहा है, और इसके पीछे प्रमुख कारण हैं – सुधारों की श्रृंखला, डिजिटल क्रांति, और हरित ऊर्जा के लिए किये जा रहे प्रयास.
भारत का वैश्विक प्रभाव
भारत अब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और 2027 तक जर्मनी और जापान को पछाड़ने का अनुमान है. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, 75-80 प्रतिशत वैश्विक वृद्धि 2025 में ग्लोबल साउथ से आ सकती है, जिसमें भारत और इंडोनेशिया का प्रमुख योगदान रहेगा. भारत की अर्थव्यवस्था में गतिशीलता और युवा जनसंख्या के योगदान से इसे वैश्विक विस्तार में मदद मिल रही है.
भारत की वृद्धि का आधार
भारत के सुधारों में प्रमुख बदलाव जैसे Goods and Services Tax (GST), Insolvency and Bankruptcy Code, और Real Estate Regulation Act (RERA) ने व्यापार के माहौल को पारदर्शी और सुलभ बनाया है. इसके अलावा, बैंकिंग क्षेत्र में वित्तीय समावेशन के प्रयासों ने भी महत्वपूर्ण बदलाव किया है. 2016 में जहां 18 प्रतिशत महिलाओं के पास बैंक खाता था, वहीं अब यह आंकड़ा 91 प्रतिशत तक पहुंच चुका है.
हरित ऊर्जा में भारत का कदम
भारत का भविष्य अब डिजिटल नवाचार और पर्यावरणीय स्थिरता के साथ जुड़ा हुआ है. भारत द्वारा हरित हाइड्रोजन उत्पादन और वितरण की दिशा में किए गए प्रयास इसे एक हरित ऊर्जा शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं.
वैश्विक वृद्धि में भारत का योगदान
भारत के इस सुधारात्मक दृष्टिकोण से यह तय है कि आने वाले दशकों में यह वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रमुख योगदानकर्ता बनेगा. बुनियादी ढांचे, डिजिटल प्रगति और हरित ऊर्जा के क्षेत्रों में निवेश से भारत 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है.
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