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2018 के बाद भारत में 1.4 करोड़ नई मैन्युफैक्चरिंग नौकरियां जुड़ीं, अकेले कस्टम सिलाई का रहा 33% योगदान

2018-2024 के बीच मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 1.4 करोड़ नई नौकरियां बनीं, जिनमें से 5 लाख से अधिक सिर्फ कस्टम टेलरिंग में हैं. रिपोर्ट बताती है कि यह रोजगार वृद्धि मुख्य रूप से छोटे शहरों में बढ़ती मांग के चलते हुई है.

भारत में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रोजगार की तस्वीर बदल रही है. रिपोर्ट के अनुसार, 2018 से 2024 के बीच देश में अनुमानित 1.4 करोड़ नई मैन्युफैक्चरिंग नौकरियां बनी हैं, जिनमें से करीब 50 लाख यानी एक-तिहाई से अधिक नौकरियां सिर्फ कस्टम टेलरिंग में हुई हैं.

डाटा फॉर इंडिया की रिपोर्ट में पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) और जनगणना आधारित अनुमान का हवाला देते हुए बताया गया कि टेलरिंग अब मैन्युफैक्चरिंग में रोजगार वृद्धि का एक प्रमुख स्रोत बन चुकी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2021 के बाद यह वृद्धि और तेज हुई, जो महामारी के बाद आर्थिक रिकवरी और छोटे शहरों में बढ़ते डिस्पोजेबल इनकम के साथ जुड़ी हुई है. लगभग 99% टेलर अनौपचारिक सेक्टर में काम कर रहे हैं, यानी इनके पास कोई कानूनी पंजीकरण, कॉन्ट्रैक्ट या सोशल सिक्योरिटी नहीं है. इसके अलावा, 80% से अधिक टेलरों ने कभी वोकैशनल ट्रेनिंग नहीं ली.

क्यों बढ़ रही है मांग?

आकड़े बताते हैं कि टेलरों की आमदनी अन्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के मुकाबले कम है. रिपोर्ट के अनुसार, करीब 80% सेल्फ-एम्प्लॉइड टेलर मासिक लगभग 6,000 रुपए कमाते हैं, जो कि अन्य क्षेत्रों में औसत कमाई का आधा भी नहीं है. विशेषज्ञों का कहना है कि टेलरिंग में रोजगार वृद्धि की मुख्य वजह कस्टम-फिट कपड़ों की बढ़ती मांग, कपड़ों की मरम्मत और छोटे शहरों में माइक्रो-एंटरप्राइज का विकास है. यही कारण है कि टेलरिंग अब मैन्युफैक्चरिंग जॉब मार्केट में सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक बन गई है.

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-भारत एक्सप्रेस



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