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जितिन प्रसाद ने राज्यसभा में बताया सफलता का मंत्र, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग ₹11.32 लाख करोड़ तक पहुंची

केंद्र सरकार की PLI योजनाओं और अन्य नीतिगत प्रयासों के चलते भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल फोन निर्माण में वृद्धि दर्ज की गई है. मंत्री जितिन प्रसाद के अनुसार, भारत अब इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण में वैश्विक भागीदार बनता जा रहा है.

जितिन प्रसाद

जितिन प्रसाद

केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न योजनाओं, जैसे कि बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन (PLI‑LSEM) और आईटी हार्डवेयर के लिए PLI, ने भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग तथा निर्यात को नई ऊँचाई पर पहुंचा दिया है.

सूचना और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने संसद के राज्यसभा में लिखित उत्तर में बताया कि 2014‑15 में लगभग ₹1.90 लाख करोड़ की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग आज 2024‑25 में ₹11.32 लाख करोड़ तक पहुंच गई है.
उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन निर्माताओं की संख्या महज़ 2 से बढ़कर अब 300 से अधिक हो चुकी है. PLI‑LSEM लागू होने के बाद 2020‑21 में ₹2.20 लाख करोड़ रहे मोबाइल उत्पादन आज ₹5.50 लाख करोड़ के स्तर को पार कर चुका है.

निर्यात के लिहाज़ से भी भारत ने बढ़त दर्ज की है. 2014‑15 में इलेक्ट्रॉनिक सामान का निर्यात लगभग ₹38,000 करोड़ था, जो अब 2024‑25 में बढ़कर ₹3.26 लाख करोड़ हो गया है. इसी प्रकार, मोबाइल फोन का निर्यात ₹22,000 करोड़ से बढ़कर ₹2.20 लाख करोड़ से ऊपर पहुँच गया है. इस तरह, इलेक्ट्रॉनिक्स अब देश का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र बन चुका है.

उद्योग को मिली नई रफ्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की सोच के तहत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर पॉलिसी के माध्यम से पूरे निर्माण श्रृंखला को विकसित करने का रणनीतिक निर्णय लिया है. 2020 में शुरू हुए PLI‑LSEM से अब तक ₹14,065 करोड़ का निवेश सामने आ चुका है. इसके अलावा, कस्टम ड्यूटी, टैक्सेशन, FDI नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव कर निर्माण कंपनियों के लिए माहौल अनुकूल बनाया गया है.

तीन साल से भी कम समय में सरकार ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में 10 यूनिटों को मंजूरी दी है, जिनमें सिलिकॉन फैब, सिली कार्बाइड फैब, एडवांस पैकेजिंग, मेमोरी पैकेजिंग आदि शामिल हैं. इन यूनिटों का कुल निवेश लगभग ₹1.6 लाख करोड़ है. इनके माध्यम से उपभोक्ता उपकरण, औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, दूरसंचार, एयरोस्पेस व पावर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों के लिए चिप्स की आपूर्ति की जाएगी.

आंकड़ों के अनुसार, FY25 में इलेक्ट्रॉनिक गुड्स का आयात लगभग 98.6 बिलियन डॉलर था, जबकि निर्यात लगभग 38.5 बिलियन डॉलर रहा. मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि इन सामूहिक प्रयासों की वजह से भारत अब इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण में वैश्विक भागीदार के रूप में उभर रहा है.

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-भारत एक्सप्रेस



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