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टाटा ग्रुप की TIL के लिए दिसंबर में ‘अग्नि परीक्षा’, ₹800 करोड़ के Bond Redemption ने बढ़ाई चिंता, ब्याज दरें और नकदी संकट बढ़ेगा

टाटा इंटरनेशनल को दिसंबर में ₹800 करोड़ के बॉन्ड रिडेम्पशन करना है. विफल होने पर ब्याज दर 9.1% से बढ़कर 12.1% हो सकती है, जिससे कंपनी के वित्तीय खर्च और कैश फ्लो पर दबाव बढ़ जाएगा.

Tata International
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

टाटा ग्रुप की वैश्विक व्यापार शाखा टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड (TIL) इस दिसंबर में बड़े वित्तीय चुनौती का सामना करने जा रही है. कंपनी को लगभग ₹800 करोड़ मूल्य के बॉन्ड भुनाना (Bond Redemption) है. यदि TIL इसे भुनाने में विफल रहती है, तो इन डिबेंचर (Debentures) पर ब्याज दर 9.1% से बढ़कर 12.1% हो जाएगी, जो बड़ी तीन-प्रतिशत की बढ़ोतरी है. यह वृद्धि कंपनी के वित्तीय खर्चों को काफी बढ़ा सकती है और इसके नकदी प्रवाह पर गंभीर दबाव डाल सकती है.

ये नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCDs) दिसंबर 2022 में पुराने बॉन्डों के Refinance के लिए जारी किए गए थे, और इनमें तीन साल की ‘फर्स्‍ट ऑप्‍शनल कॉल डेट’ है. इस तेज कूपन दर बदलाव के कारण, यह Redemption कंपनी के लिए अनिवार्य हो जाता है.

कमज़ोर वित्तीय स्थिति और बढ़ते कर्ज का बोझ

यह Bond Redemption ऐसे समय में आ रहा है जब TIL की वित्तीय स्थिति पहले से ही कमज़ोर है. वित्त वर्ष 2024 में कंपनी का राजस्व लगभग ₹28,000 करोड़ था, लेकिन इसका परिचालन मार्जिन केवल एक प्रतिशत रहा. सितंबर 2024 तक कंपनी का शुद्ध ऋण (Net Debt) ₹4,100 करोड़ से ऊपर पहुँच चुका है. वित्त वर्ष 2025 में टर्नओवर बढ़कर लगभग ₹32,000 करोड़ होने के बावजूद, हाई लीवरेज, विदेशी मुद्रा हानि और कमजोर ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस के कारण TIL को लगभग ₹477 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ.

पर्पेचुअल इंस्ट्रूमेंट्स सहित कंपनी का कुल ऋण ₹5,000 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है. यदि TIL इन बॉन्डों को चुकाने में देरी करती है या उन्हें रोलओवर करती है, तो इससे कंपनी का वार्षिक ब्याज खर्च लगभग ₹24 करोड़ तक बढ़ सकता है, जिससे उसकी Liquidity पर और भी अधिक दबाव पड़ेगा.

टाटा संस की फंडिंग योजना, ट्रस्टों में मतभेद

अपनी तनी हुई बैलेंस शीट को देखते हुए, TIL को इन बॉन्डों के पुनर्वित्त का सहारा लेना पड़ सकता है या अपने प्रमोटर टाटा संस पर निर्भर रहना पड़ सकता है. टाटा संस ने पहले ही ₹1,000 करोड़ के पूंजीगत निवेश (Capital Infusion) को मंजूरी दे दी है. हालांकि, यह फंडिंग निर्णय टाटा ट्रस्ट्स के Trustees के बीच चल रहे मतभेद को और गहरा रहा है, जो सामूहिक रूप से टाटा संस के 66% के मालिक हैं.

कुछ Trustees ने टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के आर्टिकल 121ए का हवाला देते हुए इस फंडिंग पर सवाल उठाए हैं, जिसके लिए बड़े वित्तीय निर्णयों के लिए ट्रस्ट की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होती है.

टाटा संस के अध्यक्ष एन. चंद्रशेखरन ने स्वीकार किया है कि पूंजीगत निवेश निकट-अवधि के दबाव को कम कर सकता है, लेकिन TIL को गहरी संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने आगाह किया कि कंपनी को कुल ₹3,000 करोड़ तक के समर्थन की आवश्यकता हो सकती है, जो मौजूदा योजना का तीन गुना है. उन्होंने सितंबर 2026 तक एक समीक्षा की सिफारिश की है.

ये घटनाक्रम टाटा ट्रस्ट्स के भीतर एक बढ़ते विभाजन को उजागर करते हैं. एक गुट सख्त कॉर्पोरेट गवर्नेंस की निगरानी पर जोर दे रहा है, जबकि दूसरा गुट टाटा ग्रुप के मामलों में त्वरित, केंद्रीकृत निर्णय लेने की वकालत कर रहा है.

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