Bharat Express DD Free Dish

ईरान से तेल खरीदना पड़ा भारी, ट्रंप ने आधा दर्जन से ज्यादा भारतीय कंपनियों पर लगाया बैन, जानें पूरा मामला क्या है?

अमेरिका के Donald Trump प्रशासन की ओर से ईरान के साथ व्यापार करने के लिए भारत की आधा से ज्यादा भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंधों की घोषणा की. ऐसे में चलिए जानते हैं आखिर वो कंपनियां कौन सी हैं.

US India trade

US India trade: जहां एक ओर अमेरिका भारत पर 25 फीसदी का टैरिफ लगाने का ऐलान किया गया है तो वहीं दूसरी ओर ट्रंप प्रशासन इतने में नहीं मान रही है. रूस के साथ कारोबार करने पर जुर्माना का ऐलान किया गया तो वहीं ईरान के साथ पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की खरीद में शामिल होने के आरोप में भारत की छह से अधिक कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया हैं. यह कार्रवाई वैश्विक स्तर पर 20 संस्थाओं को निशाना बनाते हुए किया गया है, जिसके तहत भारत, तुर्की, चीन, यूएई और इंडोनेशिया जैसी कंपनियां शामिल हैं. ऐसे में चलिए जानते हैं क्या है पूरा मामला?

कौन-कौन सी कंपनियां हैं निशाने पर?

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जिन भारतीय कंपनियों को प्रतिबंधित किया गया है, उनमें देश की कुछ प्रमुख पेट्रोकेमिकल ट्रेडिंग कंपनियां शामिल हैं.

  • Alchemical Solutions Private Limited पर आरोप है कि उसने जनवरी 2024 से दिसंबर 2024 के बीच 84 मिलियन डॉलर से ज्यादा के ईरानी पेट्रोकेमिकल उत्पादों का आयात किया.
  • Global Industrial Chemicals Limited ने जुलाई 2024 से जनवरी 2025 के बीच 51 मिलियन डॉलर से अधिक का मेथनॉल समेत अन्य उत्पाद खरीदे.
  • Jupiter Dye Chem Private Limited ने 49 मिलियन डॉलर मूल्य के उत्पादों का आयात किया, जिनमें टोल्यून प्रमुख था.
  • Ramniklal S Gosalia and Company पर 22 मिलियन डॉलर से अधिक के लेन-देन का आरोप है.
  • Persistent Petrochem Private Limited ने अक्टूबर से दिसंबर 2024 के बीच 14 मिलियन डॉलर के मेथनॉल उत्पाद मंगाए.
  • वहीं Kanchan Polymers ने ईरानी पॉलीथीन उत्पादों की 1.3 मिलियन डॉलर से ज्यादा की खरीद की.

क्या है प्रतिबंध का असर?

इन सभी कंपनियों की अमेरिका में मौजूद संपत्तियां या अमेरिकी नागरिकों द्वारा नियंत्रित संपत्तियां अब फ्रीज कर दी गई हैं. अमेरिकी कंपनियों और व्यक्तियों को इन संस्थाओं के साथ किसी भी तरह के व्यापार की अनुमति नहीं है. इसके अलावा जो भी कंपनियां इन प्रतिबंधित संस्थाओं की 50% या उससे अधिक हिस्सेदारी रखती हैं, वे भी प्रतिबंध के दायरे में आ जाएंगी.

यह कार्रवाई अमेरिका की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसे वह ईरान की “छाया बेड़े” और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नेटवर्क को रोकने के लिए चला रहा है. अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ईरान अपने तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों से होने वाली आय का उपयोग मध्य-पूर्व में “अस्थिरता फैलाने” और आतंकी संगठनों को समर्थन देने में करता है.

ये भी पढ़ें: Share Market Crash: ट्रंप के टैरिफ ऐलान से भारतीय शेयर बाजार धड़ाम, इन कंपनियों पर पड़ा असर, भारत को कितना होगा नुकसान?

भारत-ईरान व्यापार का संदर्भ

भारत ने ऐतिहासिक रूप से ईरान के साथ व्यापारिक संबंध बनाए रखे हैं, लेकिन 2019 के बाद अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ईरानी तेल का आयात काफी घट चुका है. इसके बावजूद, हालिया घटनाओं से यह साफ है कि कुछ कंपनियां अब भी ईरानी उत्पादों की खरीद में संलिप्त हैं.

क्या कंपनियों को मिलेगी राहत?

अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने स्पष्ट किया है कि इन कंपनियों को Specially Designated Nationals (SDN) सूची से हटाए जाने के लिए याचिका दाखिल करने का विकल्प खुला है. उनके मुताबिक, इन प्रतिबंधों का लक्ष्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि आचरण में सकारात्मक बदलाव लाना है. भारतीय कंपनियों के अलावा अमेरिका ने तुर्की, यूएई, चीन और इंडोनेशिया की भी कई कंपनियों पर यही कार्रवाई की है. इस नेटवर्क पर आरोप है कि ये ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल्स की तस्करी को बढ़ावा दे रहे हैं.

Follow Bharat Express on X

-भारत एक्सप्रेस 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read