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‘मैं मुंबई क्राइम ब्रांच से बोल रहा हूं…’: कानपुर में बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर 48 लाख ठगे, ₹1 करोड़ की FD तुड़वाते समय खुली पोल

Kanpur digital arrest cyber fraud: कानपुर में बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर 48.20 लाख रुपये ठगने वाले 3 शातिर गिरफ्तार. 1 करोड़ की FD तुड़वाते समय बैंक कर्मियों की सतर्कता से खुली गिरोह की पोल.

Digital Arrest, Cyber Crime
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

Cyber Crime: उत्तर प्रदेश के कानपुर में साइबर थाना पुलिस ने खुद को सीबीआई और मुंबई क्राइम ब्रांच का वरिष्ठ अधिकारी बताकर बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट करने वाले एक बड़े साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने गिरोह के तीन सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक अन्य मुख्य आरोपी अभी फरार है. यह गिरोह बुजुर्ग से अब तक 48.20 लाख रुपये ऐंठ चुका था और उनसे 1 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) भी तुड़वाने की फिराक में था.

‘क्राइम ब्रांच और CBI’ का डर दिखाकर किया डिजिटल अरेस्ट

पुलिस के अनुसार, साइबर जालसाजों ने कानपुर के स्वरूपनगर निवासी वरिष्ठ नागरिक योगेश चंद्र मिश्रा को फोन कॉल किया. कॉल पर शातिरों ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई का अधिकारी बताया. आरोपियों ने कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का खौफ दिखाकर बुजुर्ग को मानसिक रूप से बंधक यानी ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया. भय और दबाव के चलते पीड़ित ने अलग-अलग बैंक खातों में लगभग 48.20 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए.

1 करोड़ की FD तुड़वाने बैंक पहुंचे तो कर्मचारियों को हुआ शक

ठगी का यह पूरा खेल तब बेनकाब हुआ जब पीड़ित बुजुर्ग भारी मानसिक तनाव में अपनी 1 करोड़ रुपये की एफडी तुड़वाने बैंक शाखा पहुंचे. बुजुर्ग की घबराहट और हड़बड़ाहट देखकर बैंक कर्मचारियों को किसी बड़ी गड़बड़ी और साइबर फ्रॉड का संदेह हुआ. बैंक कर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए तुरंत पुलिस से संपर्क किया, जिससे बुजुर्ग की एक करोड़ रुपये की रकम डूबने से बच गई.

फर्जी कंपनी, 611 खाते और 1.42 करोड़ की ठगी का खुलासा

पुलिस गिरफ्त में आए आरोपियों की पहचान वासु, आतिश कुमार और कंचन प्रजापति के रूप में हुई है, जबकि इनका साथी मुकुल चौबे फरार है. प्राथमिक जांच में सामने आया कि गिरोह ने जाली दस्तावेजों के सहारे ‘BAUKOYO CONTRACTORS PRIVATE LIMITED’ नाम से एक फर्जी शेल कंपनी और बैंक खाता तैयार किया था. इस खाते में 15 लेन-देन के जरिए 25.98 लाख रुपये मंगाए गए और उसी दिन उसे देश के विभिन्न राज्यों के लगभग 611 बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया. नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) की जांच में इन खातों से जुड़े 4 अन्य साइबर अपराध भी मिले हैं. पुलिस के अनुसार, गिरोह अब तक करीब 1.42 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दे चुका है.

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