Pakistani Spy: देश की राजधानी दिल्ली स्थित नौसेना भवन से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां रक्षा मंत्रालय से जुड़ी संवेदनशील जानकारी को लीक करने के आरोप में एक अपर डिवीजन क्लर्क (यूडीसी) को गिरफ्तार किया गया है.
यह गिरफ्तारी राजस्थान पुलिस की इंटेलिजेंस विंग द्वारा 25 जून 2025, बुधवार को की गई, जिसने सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मचा दिया है.
आरोपी की पहचान विशाल यादव के रूप में हुई है, जो हरियाणा के रेवाड़ी जिले के पुनसिका गांव का रहने वाला है और दिल्ली के नौसेना भवन में क्लर्क के पद पर कार्यरत था.
सोशल मीडिया के जरिए रची गई जासूसी की साजिश
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपी ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक महिला से संपर्क किया था, जिसने खुद को पत्रकार बताया. बाद में जांच में यह सामने आया कि वह महिला पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की हैंडलर थी.
राजस्थान पुलिस को इस संबंध में खुफिया इनपुट मिला था कि भारतीय नौसेना से जुड़ा एक कर्मचारी संवेदनशील जानकारी दुश्मन देश को भेज रहा है. इसी आधार पर पुलिस की इंटेलिजेंस टीम ने निगरानी शुरू की और आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखी गई.
ISI को भेजे जा रहे थे गोपनीय दस्तावेज
पुलिस के अनुसार, आरोपी सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड माध्यमों के जरिए लगातार गोपनीय दस्तावेज, फोटोग्राफ और वीडियो पाकिस्तान भेज रहा था. उसके खिलाफ शासकीय गुप्त बात अधिनियम 1923 (Official Secrets Act) के तहत मामला दर्ज किया गया है.
गिरफ्तारी के बाद आरोपी के मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है.
विशाल यादव द्वारा लीक की गई जानकारियों में भारतीय नौसेना की मूवमेंट और अभ्यास योजनाएं, उच्च स्तरीय रक्षा बैठकों की जानकारी, नौसेना भवन और अन्य प्रतिष्ठानों के नक्शे और फोटोज, और रक्षा मंत्रालय से जुड़ी आंतरिक फाइलें व मेमो शामिल हैं.
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि आरोपी भारत के सबसे संवेदनशील और सुरक्षित क्षेत्रों में से एक, नौसेना भवन में कार्यरत था, जहां से देश की समुद्री सुरक्षा की नीतियां और रणनीतियां बनाई जाती हैं.
कई एजेंसियों ने संभाली जांच, बड़ा नेटवर्क होने की आशंका
इस खुलासे के बाद अब केंद्रीय खुफिया एजेंसियाँ, नौसेना इंटेलिजेंस और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल भी जांच में शामिल हो गई हैं.
राजस्थान पुलिस आरोपी से ट्रांजिट रिमांड पर पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह अकेले काम कर रहा था या किसी बड़े जासूसी नेटवर्क का हिस्सा था.
यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि दुश्मन देश सोशल मीडिया और हनी ट्रैप जैसे हथकंडों का इस्तेमाल कर भारतीय सुरक्षा तंत्र में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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