केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अपने पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव करते हुए पहली से आठवीं कक्षा तक मैथिली भाषा को मातृभाषा विषय के रूप में शामिल करने का फैसला किया है. इस निर्णय के बाद बिहार में खुशी का माहौल है. राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे मिथिला क्षेत्र की संस्कृति और भाषा के लिए महत्वपूर्ण बताया है.
PM मोदी के नेतृत्व में मिला भाषाओं को मजबूती- CM
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि, “मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और मातृभाषा मैथिली को शिक्षा व्यवस्था में सशक्त स्थान दिलाने की दिशा में लिया गया यह निर्णय ऐतिहासिक एवं अत्यंत स्वागतयोग्य है. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के पाठ्यक्रम में कक्षा 1 से माध्यमिक स्तर तक मैथिली भाषा को मातृभाषा विषय के रूप में मान्यता मिलना मिथिला की सांस्कृतिक अस्मिता और भाषाई गौरव के लिए गर्व का विषय है.”
CM सम्राट चौधरी ने आगे लिखा कि, “आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय भाषाओं, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन को निरंतर नई मजबूती मिल रही है. यह निर्णय न केवल मैथिली भाषा को नई पहचान और सम्मान देगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी मातृभाषा, संस्कृति और जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी बनेगा. ”
मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और मातृभाषा मैथिली को शिक्षा व्यवस्था में सशक्त स्थान दिलाने की दिशा में लिया गया यह निर्णय ऐतिहासिक एवं अत्यंत स्वागतयोग्य है।
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— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) May 25, 2026
केंद्र सरकार और शिक्षा नीति का असर
यह बदलाव शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू किया जाएगा. जानकारी के अनुसार, केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री ने एक पत्र के माध्यम से इस निर्णय की पुष्टि की है. यह प्रक्रिया एक सांसद के अनुरोध के बाद शुरू हुई, जिसके बाद राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने इसकी समीक्षा की.
नई शिक्षा नीति 2020 में भी इस बात पर जोर दिया गया है कि शुरुआती शिक्षा मातृभाषा में दी जानी चाहिए. नीति के अनुसार कक्षा 5 तक और संभव हो तो कक्षा 8 तक पढ़ाई का माध्यम स्थानीय भाषा रखने की सलाह दी गई है.
मैथिली भाषा का महत्व
मैथिली भारत की संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल एक मान्यता प्राप्त भाषा है. इसे देश की 22 प्रमुख भाषाओं में जगह मिली हुई है. NCERT ने भी कई भारतीय भाषाओं में प्राथमिक स्तर के पाठ्यक्रम तैयार किए हैं, जिसमें मैथिली भी शामिल है.
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सीबीएसई का यह कदम न केवल मैथिली भाषा को शिक्षा में नई पहचान देगा, बल्कि बच्चों को अपनी संस्कृति से जोड़ने में भी मदद करेगा. इससे क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और उनके विकास को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.
-भारत एक्सप्रेस
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