जंतर-मंतर से राजघाट तक छात्रों का भारी विरोध- (AI IMAGE)
Anti Reservation Protest: दिल्ली में जाति आधारित व्यवस्था के बजाय आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की मांग को लेकर युवाओं का ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ देर रात उग्र हो गया. जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह प्रदर्शन तड़के राजघाट तक पहुंच गया, जिसके बाद पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया.
दिल्ली में आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग कर रहे छात्रों का विरोध जंतर-मंतर से राजघाट तक फैला. पुलिस ने बिना अनुमति प्रदर्शन करने पर कई युवाओं को हिरासत में लिया. वर्तमान में देश की शिक्षा प्रणाली में 25% RTE प्राइवेट स्कूल कोटे से लेकर 59.5% तक उच्च शिक्षा आरक्षण लागू है, जिसे प्रदर्शनकारी आर्थिक आधार पर बदलने की मांग कर रहे हैं.
जाति नहीं, आर्थिक आधार पर मिले आरक्षण
दिल्ली में शुक्रवार को जाति आधारित आरक्षण के विरोध में देश के कोने-कोने से आए युवा सड़कों पर उतर आए. ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ के बैनर तले जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए प्रदर्शनकारियों का साफ कहना था कि सरकारी सुविधाओं, कोचिंग और शिक्षा में आरक्षण का आधार ‘जाति’ नहीं बल्कि छात्र की ‘आर्थिक स्थिति’ होनी चाहिए. युवाओं का तर्क है कि हर जाति के गरीब छात्र को समान अवसर और सरकारी मदद मिलनी चाहिए.
क्या है शिक्षा में आरक्षण का वर्तमान गणित?
आज देश में आरक्षण की व्यवस्था दो अलग-अलग स्तरों पर काम करती है:
- प्राइवेट व सरकारी स्कूल: ‘शिक्षा का अधिकार’ (RTE Act) के तहत हर प्राइवेट स्कूल को अपनी शुरुआती कक्षाओं में ‘25% सीटें’ आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखनी होती हैं.
- कॉलेज व उच्च शिक्षण संस्थान: सरकारी और गैर-अल्पसंख्यक प्राइवेट कॉलेजों में कुल ‘59.5% सीटें’ आरक्षित हैं. इसमें OBC को 27%, SC को 15%, ST को 7.5% और सामान्य वर्ग के EWS को 10% कोटा दिया गया है.
प्रदर्शनकारी छात्र इसी 59.5% जातिगत कोटे को खत्म कर इसे पूरी तरह ‘आर्थिक पैमाने’ में बदलने की मांग कर रहे हैं.
आधी रात को पुलिस की सख्ती
शुक्रवार देर रात जंतर-मंतर पर माहौल तब तनावपूर्ण हो गया जब पुलिस ने बिना अनुमति चल रहे प्रदर्शन को हटाने के लिए कार्रवाई की. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने उनका मंच तोड़ दिया और शांतिपूर्ण भूख हड़ताल कर रहे युवाओं पर बल प्रयोग किया. जंतर-मंतर से हटाए जाने के बाद कई छात्र तड़के राजघाट पहुंच गए, लेकिन पुलिस ने वहां भी सख्ती दिखाते हुए कई आंदोलनकारियों को हिरासत में ले लिया और बसों में भरकर ले गई.
पुलिस की सफाई और आगे का रुख
मामले पर दिल्ली पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर या राजघाट पर किसी भी तरह के प्रदर्शन या जुलूस की अनुमति नहीं दी गई थी. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी था. वहीं, पुलिस ने स्पष्ट किया कि रामलीला मैदान में शाम 4 बजे तक केवल 500 लोगों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने तय शर्तों का उल्लंघन किया. फिलहाल, नई दिल्ली इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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