NITI Aayog
नीति आयोग (NITI Aayog) ने स्कूली बच्चों की पढ़ाई को लेकर एक नई सिफारिश की है. नीति आयोग का मानना है कि बच्चे केवल किताबी शिक्षा तक ही सीमित न रहे, बल्कि वह पढ़ाई के दौरान ही हुनरमंद भी बने. इसी सिलसिले में नीति आयोग ने देश के स्कूलों में छठी कक्षा से ही ‘एम्प्लॉयबिलिटी और एंटरप्रेन्योरशिप स्किल’ यानी रोजगार और बिजनेस से जुड़ी ट्रेनिंग दी जानें की सलाह दी है.
वोकेशनल कोर्सेज का व्यवस्थित ट्रैक
नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट ‘रीइमेजिनिंग स्किलिंग फॉर विकसित भारत@2047’ में देश की शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलावों का खाका पेश किया है. आयोग का कहना है कि स्कूली शिक्षा के दौरान ही बच्चों में व्यावहारिक हुनर विकसित किया जाए. इससे वे भविष्य की जरूरतों के हिसाब से खुद को तैयार कर सकें.
आयोग ने यह भी कहा कि 9वीं कक्षा से वोकेशनल कोर्सेज का एक व्यवस्थित ट्रैक तैयार किया जाए. वहीं 11वीं और 12वीं के छात्रों के लिए ‘जनरल एम्प्लॉयबिलिटी एंड एंटरप्रेन्योरशिप स्किल्स’ (GEES) को एक अलग और अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाना चाहिए.
हर सब्जेक्ट को बराबर का वेटेज
रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने 10वीं और 12वीं के बोर्ड एग्जाम में वोकेशनल सब्जेक्ट्स को बाकि विषयों की ही तरह बराबर का वेटेज (अंक) देने का सुझाव दिया है. इसके साथ ही राज्य शिक्षा बोर्ड्स को भी इस नए मॉडल को अपनाने की सलाह दी है.
किस बात पर जताई चिंता?
रिपोर्ट में इस बात पर चिंता जताई गई है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क में छठी कक्षा से ही वोकेशनल ट्रेनिंग की बात कही गई है, लेकिन जमीन पर इसका अमल बहुत धीमा है. फिलहाल देश के 12 सेकेंडरी स्कूलों में से औसतन 1 स्कूल में भी यह सुविधा उपलब्ध नहीं है.
नीति आयोग ने इस बात पर जोर दिया है कि अप्रेंटिसशिप (Apprenticeship) यानी काम के साथ सीखने के मॉडल को मुख्यधारा में लाना होगा, ताकि पढ़ाई और नौकरी के बीच की खाई को पाटा जा सके.
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-भारत एक्सप्रेस
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