Student Rights: तमिलनाडु में चेन्नई के सत्यभामा विश्वविद्यालय (Sathyabama University Chennai) के एक छात्र ने लोकपाल के समक्ष शिकायत की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय लिंग भेद (Gender Segregation) में लिप्त है, जिसके कारण उसे अपमान झेलना पड़ा है. छात्र के अनुसार, पुरुष और महिला छात्रों को एक साथ बैठने से रोका जा रहा है, जिससे लैंगिक भेदभाव और मानसिक तनाव (Mental Distress) पैदा हो रहा है.
यह शिकायत 4 अक्टूबर 2025 को दायर की गई थी, जिसमें दावा किया गया कि कुलपति ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते हुए लिंग भेद की नीति लागू की. छात्र ने यह भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय ने शिकायत वापस लेने के लिए छात्रों और उनके माता-पिता को धमकाया. लोकपाल ने इस मामले में 17 अक्टूबर 2025 को हस्तक्षेप से इनकार कर दिया, क्योंकि यह भ्रष्टाचार से संबंधित नहीं माना गया.
यहां आप ट्वीट के जरिए पूरा मामला समझ सकते हैं.
A student from Sathyabama University, Chennai has filed a complaint with Lokpal over ‘gender segregation’ in classrooms.
The student has alleged that “University is not permitting male and female students to sit together in classrooms… causing mental distress…”
Alas, though… pic.twitter.com/xQGWotyKD7
— Arvind Gunasekar (@arvindgunasekar) October 23, 2025
लोकपाल का निर्णय और विवाद
लोकपाल (Lokpal) के पांच सदस्यीय पैनल, जिसमें न्यायमूर्ति एल. नारायणा स्वामी (अध्यक्ष) सहित अन्य शामिल हैं, ने फैसला सुनाया कि यह मामला उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, क्योंकि यह शैक्षिक नीति से जुड़ा है, न कि भ्रष्टाचार से. इस निर्णय ने छात्र समुदाय और सामाजिक कार्यकर्ताओं में नाराजगी पैदा की है, जो इसे समानता और मानसिक स्वास्थ्य के अधिकारों का उल्लंघन मानते हैं. विश्वविद्यालय ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है. सोशल मीडिया पर इस मामले ने तूल पकड़ा, जहां कई यूजर्स ने Gender Segregation को पुरातनवादी नीति करार दिया. दूसरी ओर, कुछ ने इसे विश्वविद्यालय के आंतरिक नियमों का हिस्सा बताया.
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