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प्रचंड जीत के बाद अमित शाह के हाथ बंगाल की कमान, नड्डा को सौंपा असम; क्या फिर चौंकाएगी BJP?

पश्चिम बंगाल (207 सीटें) और असम (82 सीटें) में शानदार जीत के बाद बीजेपी ने नई सरकार के गठन की तैयारी तेज कर दी है. विधायक दल का नेता चुनने के लिए अमित शाह को बंगाल और जेपी नड्डा को असम का केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया गया है. जानिए क्या हैं इसके मायने?

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पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक और प्रचंड जीत दर्ज करने के बाद, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खेमे में अब नई सरकार के गठन की तैयारियां तेज हो गई हैं. 4 मई को आए नतीजों में दोनों ही राज्यों में बीजेपी ने पूर्ण बहुमत हासिल कर विपक्ष को पूरी तरह पस्त कर दिया है. अब सबसे बड़ा सस्पेंस ‘मुख्यमंत्री के चेहरे’ को लेकर है. इसी कड़ी में बीजेपी आलाकमान ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लेते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पश्चिम बंगाल में विधायक दल का नेता चुनने के लिए ‘केंद्रीय पर्यवेक्षक’ नियुक्त किया है.

बंगाल में शाह की नियुक्ति के क्या हैं मायने?

पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों ने पूरे देश को चौंकाया है. जहाँ BJP ने 206 सीटों के साथ सत्ता में शानदार एंट्री की है, वहीं दशकों तक राज करने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) मात्र 80 सीटों पर सिमट गई है. कांग्रेस, AJUP और CPIM जैसे दलों का सूपड़ा साफ हो गया है (कांग्रेस-2, AJUP-2, CPIM-1).

इतने विशाल जनादेश के बाद बंगाल के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री का चयन कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं है. अमित शाह को इस ऐतिहासिक राज्य का पर्यवेक्षक बनाने के स्पष्ट मायने हैं कि केंद्रीय नेतृत्व सरकार गठन को लेकर पूरी तरह गंभीर है. अमित शाह के साथ ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को केंद्रीय सह-पर्यवेक्षक बनाया गया है. शाह की उपस्थिति यह सुनिश्चित करेगी कि विधायक दल का नेता न सिर्फ पार्टी के विजन के अनुरूप हो, बल्कि बंगाल जैसे महत्वपूर्ण राज्य को पूरी मजबूती के साथ चला सके.

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असम की जिम्मेदारी जेपी नड्डा के कंधों पर

दूसरी तरफ, असम में भी बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 82 सीटों पर जीत हासिल कर पूर्ण बहुमत की सरकार पक्की कर ली है. यहाँ मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस 19 सीटों पर ही रुक गई, जबकि BOPF को 10, AGP को 10 और AIUDF को 2 सीटें मिली हैं.

असम में नई सरकार की रूपरेखा तय करने और विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा को केंद्रीय पर्यवेक्षक की कमान सौंपी गई है. उनके सहयोग के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को केंद्रीय सह-पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है.

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क्या फिर कोई चौंकाने वाला फैसला लेगी BJP?

दोनों ही राज्यों (बंगाल और असम) में भारी बहुमत के कारण विपक्ष बेहद कमजोर स्थिति में है. अब सारा खेल बीजेपी के अंदरूनी मंथन और पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट पर टिका है. बीजेपी नेतृत्व पहले भी कई राज्यों में मुख्यमंत्री के चयन को लेकर अपने अप्रत्याशित फैसलों से जनता और राजनीतिक पंडितों को चौंकाता रहा है. अमित शाह और जेपी नड्डा के नेतृत्व में होने वाली विधायक दल की बैठकों से कौन सा नाम निकलकर सामने आएगा, इस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं. बंगाल और असम का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका फैसला अब बस कुछ ही समय की बात है.



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