केरल की राजनीति के लिए आज का दिन ऐतिहासिक होने वाला है. राज्य की 140 विधानसभा सीटों के लिए हुए चुनाव की मतगणना आज सुबह 7 बजे से शुरू होगी. चुनाव आयोग ने राज्य भर में पुख्ता इंतजाम किए हैं. पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाला वामपंथी गठबंधन (LDF) जहाँ लगातार तीसरी बार सत्ता में आकर इतिहास रचने की उम्मीद कर रहा है, वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ (UDF) सत्ता परिवर्तन की राज्य की पुरानी परंपरा को फिर से जीवित करने की कोशिश में है.
मतगणना की तैयारी: 140 सीटों पर पैनी नजर
केरल निर्वाचन आयोग ने मतगणना के लिए राज्य के 14 जिलों में 63 मुख्य मतगणना केंद्र स्थापित किए हैं. मतगणना केंद्रों के बाहर केरल पुलिस और केंद्रीय बलों की भारी तैनाती की गई है. प्रत्येक टेबल पर माइक्रो-ऑब्जर्वर्स की नियुक्ति की गई है और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जा रही है.
शुरुआती रुझान सुबह 9 बजे तक आने शुरू हो जाएंगे, जबकि दोपहर 1 बजे तक राज्य की राजनीतिक तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी.
चुनावी रण: कब हुआ मतदान और कितने थे उम्मीदवार?
केरल में इस बार विधानसभा चुनाव 16 अप्रैल 2026 को एक ही चरण में संपन्न हुए थे. राज्य की साक्षर और जागरूक जनता ने इस बार भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और लगभग 74.06% मतदान दर्ज किया गया. इस बार कुल 957 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं.
प्रमुख चेहरे: मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन (धर्मदम), वी.डी. सतीशन (परवूर), और बीजेपी के प्रमुख नेता इस त्रिकोणीय मुकाबले को दिलचस्प बना रहे हैं.
पार्टियों का समीकरण: किसने कितनी सीटों पर दांव लगाया?
केरल में मुख्य मुकाबला दो बड़े गठबंधनों के बीच है, लेकिन बीजेपी (NDA) ने इसे त्रिकोणीय बनाने की पूरी कोशिश की है.
LDF (वामपंथी गठबंधन): माकपा (CPIM) और भाकपा (CPI) सहित अन्य सहयोगियों ने सभी 140 सीटों पर मजबूती से चुनाव लड़ा.
UDF (कांग्रेस गठबंधन): कांग्रेस ने सबसे अधिक सीटों पर चुनाव लड़ा, जबकि मुस्लिम लीग और केरल कांग्रेस (जोसेफ) ने बाकी सीटों पर मोर्चा संभाला.
NDA (बीजेपी+): बीजेपी ने इस बार राज्य में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए आक्रामक प्रचार किया और करीब 115 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे, जबकि बाकी सीटें सहयोगियों को दी गईं.
2021 के नतीजे: पिछला जनादेश क्या था?
2021 के चुनाव में एलडीएफ ने दशकों पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए लगातार दूसरी बार जीत हासिल की थी:
LDF: 99 सीटें
UDF: 41 सीटें
NDA: 0 (बीजेपी का खाता नहीं खुला था)
2021 में वामपंथियों की यह जीत मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के संकट प्रबंधन (बाढ़ और महामारी) के प्रति जनता के भरोसे का परिणाम मानी गई थी.
एग्जिट पोल: क्या कह रहे हैं आंकड़े?
विभिन्न मीडिया हाउस और सर्वे एजेंसियों के एग्जिट पोल इस बार केरल में कांटे की टक्कर की ओर इशारा कर रहे हैं. कुछ एग्जिट पोल एलडीएफ को मामूली बढ़त दे रहे हैं, जबकि कुछ यूडीएफ की सत्ता में वापसी की भविष्यवाणी कर रहे हैं.
कुछ एग्जिट पोल्स के अनुसार, इस बार बीजेपी का वोट शेयर बढ़ सकता है और वह 1 से 3 सीटें जीतकर विधानसभा में फिर से खाता खोल सकती है.
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