Aamir Khan latest interview
बॉलीवुड के एक्टर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर, या कहें ऑलराउंडर आमिर खान (Aamir Khan) अपनी सारी फिल्मों को बड़ी शिद्दत से बनाते हैं. आमिर नहीं चाहते कि उनकी फिल्म के साथ या उनके ऑडियंस के साथ कुछ भी गलत दिखाया जाए. इसलिए आमिर अपनी मूवीज को बहुत संभलकर और परफेक्ट तरीके से बनाना पसंद करते हैं. यही कारण है कि उन्हें बॉलीवुड का परफेक्शनिस्ट भी कहा जाता है. फिल्मों को लेकर हाल ही में एक इंटरव्यू में बड़ा खुलासा करते हुए उन्होंने कहा, “अगर मैं मर जाऊं, तो मेरी फिल्म के साथ गलत मत होने देना.” ऐसा क्यों बोले एक्टर आमिर खान, आइए जानते हैं.
आमिर ने ऐसा क्यों कहा?
आमिर ने एक इंटरव्यू में बताया कि फिल्म की शूटिंग खत्म होने के बाद और पोस्ट-प्रोडक्शन के दौरान उन्हें काफी चिंता रहती है. ‘द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया’ के इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि, उन्हें हमेशा यह डर लगता है कि कहीं उनके साथ कुछ हो गया, जैसे प्लेन क्रैश, तो उनकी फिल्म अधूरी या गलत तरीके से न बन जाए. इसी वजह से वे हर बार फ्लाइट से पहले मंसूर के लिए एक नोट लिखकर छोड़ते हैं. साथ ही अपने डायरेक्टर से भी कहते हैं कि जरूरत पड़ने पर मंसूर से सलाह लें और फिल्म का ध्यान रखें.
आमिर खान ने बताया कि उन्होंने अपनी एक्स वाइफ किरण राव (Kiran Rao) से भी कहा है कि अगर उनके साथ कुछ हो जाए, तो उनके सभी अधूरे प्रोजेक्ट्स में मंसूर की सलाह जरूर ली जाए. उन्हें इस बात की चिंता रहती है कि उनकी गैरमौजूदगी में फिल्म सही तरीके से पूरी हो. आमिर के मुताबिक, इस जिम्मेदारी को सही तरह से निभाने के लिए वे मंसूर पर पूरी तरह भरोसा करते हैं.
जब मंसूर खान (Mansoor Khan) को आमिर की इस आदत के बारे में पता चला, तो उन्होंने कहा कि उन्हें यह बात हाल ही में मालूम हुई है और इसे जानकर अब वे खुद तनाव महसूस कर रहे हैं.
कौन हैं मंसूर खान?
मंसूर खान भारतीय सिनेमा के उन चुनिंदा फिल्मकारों में गिने जाते हैं, जिन्होंने कम फिल्में बनाकर भी गहरी छाप छोड़ी. वे खास तौर पर 1980 और 90 के दशक में अपने अलग अंदाज और संवेदनशील कहानी कहने के लिए जाने जाते हैं. मंसूर खान का जन्म मशहूर फिल्मी परिवार में हुआ था. उनके पिता नासिर हुसैन हिंदी सिनेमा के सफल लेखक-निर्देशक थे, जिनकी फिल्मों का प्रभाव मंसूर की सोच और काम में भी साफ दिखाई देता है. इसी पारिवारिक माहौल ने उन्हें फिल्म निर्माण की बारीकियां सिखाईं.
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मंसूर ने बतौर निर्देशक अपने करियर की शुरुआत 1988 में फिल्म कयामत से कयामत तक से की, जिसमें उनके चचेरे भाई आमिर खान और जूही चावला ने अभिनय किया था. यह फिल्म जबरदस्त हिट रही और बॉलीवुड में रोमांटिक फिल्मों का एक नया दौर शुरू हुआ. इसके बाद उन्होंने जो जीता वही सिकंदर बनाई, जो आज भी युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय है.
-भारत एक्सप्रेस
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