भक्ति का अलौकिक रंग, भजनों की मीठी धुन पर झूमते हजारों श्रद्धालु और आंखों में छलकते श्रद्धा के आंसू, चंडीगढ़ के सेक्टर 34 स्थित मेला ग्राउंड में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन कुछ इसी तरह हुआ. सुप्रसिद्ध कथावाचक स्वामी इंद्रेश उपाध्याय महाराज के मुखारविंद से अमृतमयी कथा का श्रवण करने रोजाना 15 से 20 हजार श्रद्धालु पहुंच रहे थे. लेकिन कथा के अंतिम दिन एक ऐसा लम्हा आया जिसने पंडाल में मौजूद हर भक्त की आंखें नम कर दीं. इस धार्मिक महाआयोजन के मुख्य आयोजक और जाने-माने बॉलीवुड सिंगर बी प्राक व्यासपीठ के सामने पूरी तरह भावुक हो गए.
व्यासपीठ पर नम हुईं सिंगर बी प्राक की आंखें
अपनी सुरीली आवाज से दुनिया भर का दिल जीतने वाले मशहूर गायक बी प्राक सात दिनों तक चले इस भक्ति महोत्सव से दिल से जुड़े रहे. कथा के विश्राम के दिन जब कथावाचक इंद्रेश महाराज को विदा करने का समय आया, तो बी प्राक अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके. हाथ जोड़कर खड़े बी प्राक ने अत्यंत विनीत भाव से कहा, ‘जैसे-जैसे भागवत कथा समापन की ओर बढ़ती है, मेरा दिल उदास होने लगता है. गुरु जी, यदि इस आयोजन के दौरान हमसे जाने-अनजाने कोई भी गलती या त्रुटि हुई हो, तो अपना बालक समझकर हमें माफ कर दीजिएगा.’
बी प्राक ने पंडाल में उमड़े युवाओं और श्रद्धालुओं से अपील करते हुए कहा कि कथा सुनना केवल एक पड़ाव है, असली सार्थकता तब है जब हम इसमें दी गई सीख और संस्कारों को अपने दैनिक जीवन में उतारें. उन्होंने बताया कि उनके दादाजी धार्मिक आयोजनों से जुड़े रहते थे और उन्हीं के पदचिन्हों पर चलते हुए वे हर साल इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं.
भगवान कृष्ण का नौका विहार और डांडिया रास
सात दिनों तक चले इस महोत्सव को यादगार बनाने के लिए भव्य इंतजाम किए गए थे. कथा स्थल पर एक कृत्रिम सुंदर जलाशय तैयार किया गया था, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को नाव की सवारी कराई गई. इस पावन अवसर पर बी प्राक और इंद्रेश महाराज ने खुद नाव में बैठकर प्रभु की आरती उतारी. समापन दिवस पर बी प्राक और इंद्रेश महाराज ने एक साथ मिलकर भक्ति भजन गाए, जिस पर पूरा पंडाल झूम उठा. इसके बाद डांडिया रास का आयोजन हुआ, जिसमें ट्राइसिटी (चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला) से आए श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.
कथावाचक इंद्रेश महाराज का आध्यात्मिक संदेश
कथा व्यास स्वामी इंद्रेश महाराज ने श्रद्धालुओं को जीवन जीने का मर्म समझाते हुए कहा कि संसार मोह-माया का जाल है और मनुष्य का अंतिम उद्देश्य प्रभु की भक्ति को प्राप्त करना है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, ‘यदि जीवन में धैर्य और प्रतीक्षा सीखना है, तो भक्त शिरोमणि मीराबाई से सीखिए. भगवान श्रीकृष्ण महाभारत में अर्जुन के सारथी बने, लेकिन उन्होंने कभी अपनी सामर्थ्य का अहंकार नहीं किया और सारा श्रेय अपनों को दिया.’ उन्होंने लोगों को काम, क्रोध और वासना से दूर रहकर मन की बात ईश्वर से साझा करने का संदेश दिया.
युवाओं की उमड़ी भारी भीड़
इस सात दिवसीय धार्मिक महाकुंभ में सबसे खास बात युवाओं की अप्रत्याशित उपस्थिति रही. कथा सुनने आई श्रद्धालु ईशा, चेष्ठा, राहुल और ऋषिमा ने बताया कि बी प्राक द्वारा आयोजित यह धार्मिक उत्सव युवाओं को हमारी सनातन संस्कृति से जोड़ने का बेहतरीन प्रयास है.
आयोजन के अंत में बी प्राक और इंद्रेश महाराज ने श्रद्धालुओं को एक और बड़ी खुशखबरी दी. उन्होंने घोषणा की कि लगातार तीन सालों के सफल आयोजन के बाद अगले वर्ष चंडीगढ़ की इसी पावन धरती पर नौ दिवसीय भव्य श्रीराम कथा का आयोजन किया जाएगा. इस घोषणा के साथ ही पूरा पांडाल ‘जय श्रीराम’ और ‘राधे-राधे’ के जयकारों से गूंज उठा.
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-भारत एक्सप्रेस
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