Dharmendra Padma Vibhushan 2026: भारतीय सिनेमा के इतिहास में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले और दर्शकों के दिलों पर दशकों तक राज करने वाले महान अभिनेता धर्मेंद्र को मरणोपरांत देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ (Padma Vibhushan) से नवाजा गया है. राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में आयोजित एक भव्य समारोह में जब धर्मेंद्र के नाम की घोषणा हुई, तो वहां मौजूद हर एक शख्स की आंखें नम हो गईं.
परदे पर अपनी कड़क आवाज और जिंदादिली के लिए मशहूर रहे धर्मेंद्र आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी अमर विरासत को देश ने इस सर्वोच्च सम्मान के साथ हमेशा-हमेशा के लिए अमर कर दिया. इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने और सम्मान ग्रहण करने के लिए उनकी पत्नी हेमा मालिनी और छोटी बेटी अहाना देओल वहां मौजूद थीं, जहां भावनाओं का एक सैलाब उमड़ पड़ा.
अवॉर्ड हाथ में आते ही छलक पड़े हेमा के आंसू
धर्मेंद्र की ओर से इस सर्वोच्च मरणोप्रांत सम्मान को स्वीकार करने के लिए जैसे ही ‘ड्रीम गर्ल’ और राजनेता हेमा मालिनी का नाम पुकारा गया, पूरे हॉल में सन्नाटा पसर गया. पारंपरिक गुलाबी साड़ी और बेहद सादगी के साथ मंच की ओर बढ़तीं हेमा मालिनी के चेहरे पर अपने जीवनसाथी को खोने का गहरा गम साफ झलक रहा था.
जैसे ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनके हाथों में पद्म विभूषण की ट्रॉफी और प्रशस्ति पत्र सौंपा, हेमा अपने जज्बातों पर काबू नहीं रख पाईं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े. एक तरफ पति को खोने का दर्द था, तो दूसरी तरफ उनकी इस ऐतिहासिक कामयाबी पर गर्व का भाव. हेमा ने बिना कुछ कहे, बेहद गरिमामय तरीके से सिर झुकाकर राष्ट्रपति का आभार व्यक्त किया.
पापा की याद में फूट-फूटकर रोईं बेटी अहाना
इस पूरे गरिमामयी समारोह का सबसे भावुक कर देने वाला दृश्य तब सामने आया, जब दर्शक दीर्घा में बैठीं धर्मेंद्र और हेमा की छोटी बेटी अहाना देओल अपने आंसुओं को रोक नहीं सकीं. अपने दिवंगत पिता के नाम की गूंज और उन्हें देश के सबसे बड़े मंच पर सम्मानित होते देख अहाना बच्चों की तरह फूट-फूटकर रोने लगीं.
पिता के साथ अपने लाडले और गहरे रिश्ते को याद कर अहाना का रो-रोकर बुरा हाल था. वह बार-बार हाथ जोड़कर आसमान की तरफ देख रही थीं, मानो अपने पापा से कह रही हों कि ‘पापा, आज देश आपको सलाम कर रहा है.’ मां और बेटी के इस रूआंसे और भावुक चेहरे को देखकर वहां उपस्थित तमाम वीवीआईपी (VVIPs) की पलकें भी भीग गईं.
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अमर विरासत को मिला देश का सबसे बड़ा सलाम
धर्मेंद्र को मिला यह सम्मान उनके उस छह दशक लंबे शानदार फिल्मी सफर की तस्दीक करता है, जिसने भारतीय सिनेमा को एक नया आयाम दिया. बॉलीवुड के असली ‘ही-मैन’ कहे जाने वाले धर्मेंद्र ने न सिर्फ ‘शोले’ में वीरू बनकर दर्शकों को गुदगुदाया और एक्शन दिखाया बल्कि ‘सत्यकाम’, ‘चुपके चुपके’, ‘प्रतिज्ञा’ और ‘यादों की बारात’ जैसी कल्ट फिल्मों के जरिए यह साबित किया कि वे अभिनय के हर रंग (एक्शन, रोमांस, कॉमेडी) के बेताज बादशाह थे. यह सम्मान उनके करोड़ों प्रशंसकों के लिए एक ऐसा गौरवशाली क्षण है, जो यह विश्वास दिलाता है कि भले ही धर्मेंद्र शारीरिक रूप से विदा हो चुके हैं, लेकिन उनकी कला कभी नहीं मर सकती.
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-भारत एक्सप्रेस
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