कोरियन ड्रामाज (K-dramas) Gen Z के बीच तेजी से लोकप्रिय हो गए हैं, क्योंकि उनकी अनोखी कहानी, आकर्षक विजुअल्स और भावनात्मक रूप से जुड़ने वाले किरदार दर्शकों को बांधे रखते हैं. ये ड्रामे न सिर्फ मनोरंजन देते हैं, बल्कि कोरियन संस्कृति, फैशन और लाइफस्टाइल को भी वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बना रहे हैं. हालांकि, इनकी बढ़ती लोकप्रियता के साथ कुछ नकारात्मक प्रभाव भी सामने आते हैं. इसलिए, K-dramas को समझदारी और संतुलन के साथ देखना जरूरी है, ताकि दर्शक इसके सकारात्मक पहलुओं का आनंद लेते हुए नकारात्मक प्रभावों से बच सकें.
अनोखी कहानी कहने की शैली
कोरियन ड्रामाज (K-dramas) ने पूरी दुनिया में अपनी खास जगह बना ली है, लेकिन Gen Z ने इसे जिस तरह अपनाया है, वह इसे एक बड़े सांस्कृतिक ट्रेंड में बदल चुका है. जो कभी सीमित दर्शकों तक सीमित था, आज वह मनोरंजन की पसंद और कहानी कहने के तरीकों को बदल रहा है. K-dramas की सबसे बड़ी खासियत उनकी कहानी कहने की शैली है. ये ड्रामे कम एपिसोड में ही गहरी भावनाओं, रोमांस, हास्य और ड्रामा का संतुलन बनाए रखते हैं. यह फॉर्मेट Gen Z के लिए खास तौर पर आकर्षक है, क्योंकि वे ऐसी कहानियां पसंद करते हैं जो कम समय में असर छोड़ें.
विजुअल अपील और एस्थेटिक्स
K-dramas अपने शानदार सिनेमैटोग्राफी और खूबसूरत लोकेशन्स के लिए भी जाने जाते हैं. इनमें दिखाए गए फैशन, घरों की सजावट और शहरी जीवनशैली दर्शकों को आकर्षित करती है. ये सिर्फ बैकग्राउंड नहीं होते, बल्कि कहानी का अहम हिस्सा बन जाते हैं. Gen Z को ऐसे किरदार पसंद आते हैं जो परफेक्ट नहीं होते, बल्कि अपनी कमियों के साथ सच्चे लगते हैं. K-dramas में अक्सर ऐसे पात्र दिखाए जाते हैं जो मानसिक स्वास्थ्य, करियर, पहचान और रिश्तों जैसी समस्याओं से जूझते हैं, जिससे युवा दर्शक खुद को उनसे जोड़ पाते हैं.
कोरियन संस्कृति का प्रभाव
K-dramas ने कोरियन म्यूजिक, फैशन और खाने को भी लोकप्रिय बनाया है. ये ड्रामे एक सांस्कृतिक पुल की तरह काम करते हैं, जो दर्शकों को एक नई जीवनशैली से परिचित कराते हैं. स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स की आसान उपलब्धता ने इस कनेक्शन को और मजबूत किया है. आज के कंटेंट से भरे दौर में K-dramas दर्शकों को एक पूरी और संतोषजनक कहानी देते हैं- जिसमें शुरुआत, मध्य और अंत स्पष्ट होता है. यही कारण है कि Gen Z के बीच इनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है.
लिंग आधारित रूढ़ियां और उनका प्रभाव
हालांकि, K-dramas में अक्सर पारंपरिक जेंडर रोल्स भी दिखाए जाते हैं. महिलाओं को कमजोर और निर्भर दिखाना, जबकि पुरुषों को मजबूत और परिवार का एकमात्र सहारा—ये छवियां दर्शकों के दिमाग में सामान्य बन जाती हैं. इसका असर खासकर किशोरों पर पड़ता है, जो अभी अपनी सोच विकसित कर रहे होते हैं. कई युवा दर्शक K-dramas में दिखाए गए ‘परफेक्ट’ शरीर और सुंदरता के मानकों को अपनाने की कोशिश करते हैं. ‘साइज जीरो’ जैसी छवि को आदर्श मानना उनके आत्मविश्वास और आत्मसम्मान को प्रभावित कर सकता है.
टॉक्सिक व्यवहार का रोमांटीकरण
K-dramas में कई बार ऐसे व्यवहार को भी रोमांटिक बना दिया जाता है, जो वास्तव में टॉक्सिक होते हैं. किशोर इन्हें सही मानने लगते हैं और अपने रिश्तों में भी ऐसी ही अपेक्षाएं रखने लगते हैं. K-dramas निस्संदेह मनोरंजन का एक शानदार माध्यम हैं, लेकिन उन्हें समझदारी से देखना जरूरी है. दर्शकों को चाहिए कि वे इनमें दिखाए गए संदेशों को समझें और वास्तविकता से अलग करें, ताकि उनका मानसिक और भावनात्मक विकास सही दिशा में हो सके.
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-भारत एक्सप्रेस
Written By: Shubhra Rai (Intern)
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