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आशा ताई को अंतिम विदाई की तैयारी शुरू, राजकीय सम्मान के साथ शिवाजी पार्क में होगा अंतिम संस्कार

भारतीय संगीत का एक युग समाप्त हो गया है. 92 वर्षीय आशा भोसले के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके आवास ‘कासा ग्रांडे’ में रखा गया है. आज शाम शिवाजी पार्क में राजकीय सम्मान के साथ उनकी अंत्येष्टि की जाएगी. देश-दुनिया के दिग्गजों ने सुरों की जादूगरनी को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है.

Asha Bhosle Funeral: सुरों की मल्लिका आशा भोसले के निधन से आज पूरा देश शोक में डूबा है. भारतीय संगीत का एक स्वर्णिम अध्याय कल हमेशा के लिए बंद हो गया. 92 वर्ष की आयु में मल्टी-ऑर्गन फेलियर के कारण दुनिया को अलविदा कहने वाली आशा ताई का आज अंतिम सफर शुरू हो रहा है.

कब, कहां और कैसे होगा अंतिम संस्कार?

आशा भोसले का अंतिम संस्कार आज सोमवार (13 अप्रैल) को मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में किया जाएगा, जिसकी तैयारी सुबह से हो रही है. शाम 4 बजे होने वाले इस अंतिम संस्कार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ संपन्न किया जाएगा और इसके लिए सुरक्षाबलों की तैनाती भी कर दी गई है.

फिलहाल, उनका पार्थिव शरीर दक्षिण मुंबई के लोअर परेल स्थित उनके निवास ‘कासा ग्रांडे’ में रखा गया है, जहां सुबह 11 बजे से ही अंतिम दर्शन शुरू हो गए हैं. प्रशासन ने शिवाजी पार्क और उनके आवास के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. उन्हें राजकीय विदाई देने के लिए पुलिस की एक टुकड़ी ने तिरंगे में लिपटे उनके पार्थिव शरीर को सलामी भी दी है.

 

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सितारों ने नम आंखों से दी विदाई

जैसे ही आशा जी के निधन की खबर आई, बॉलीवुड और खेल जगत के दिग्गजों का उनके घर पहुंचना शुरू हो गया. उनके निवास पर दिग्गजों का तांता लगा रहा. क्रिकेट जगत से सचिन तेंदुलकर भावुक नजर आए, वहीं संगीत सम्राट एआर रहमान अपनी प्रेरणा को विदाई देने पहुंचे. बॉलीवुड से तब्बू ने उनकी पोती जनाई को गले लगाकर ढांढस बंधाया, तो आशा पारेख ने उन सदाबहार गानों को याद किया जिन्होंने उन्हें पर्दे पर पहचान दी. रितेश देशमुख और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी पुष्प चक्र अर्पित कर सुरों की इस मलिका को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दी.

 

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एक ऐसी विरासत जो कभी मिट नहीं सकती

बता दें कि आशा भोसले की लैगेसी किसी एक विधा या भाषा तक सीमित नहीं रही. करीब 82 साल लंबे करियर में उन्होंने 20 से ज्यादा भाषाओं में 12,000 से अधिक गानों को अपने जादुई सुरों से सजाया. उनकी सबसे बड़ी खूबी उनकी वर्सेटैलिटी थी; जहां उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर की आवाज में ठहराव और पवित्रता थी, वहीं आशा जी की आवाज में एक गजब का उत्साह, चंचलता और आधुनिकता थी.

पद्म विभूषण से सम्मानित आशा जी ने लोक संगीत से लेकर गजल और कैबरे से लेकर भजनों तक, हर जॉनर में अपनी बादशाहत कायम की. आज भले ही वह हमारे बीच नहीं रही हैं, लेकिन उनकी आवाज आने वाली कई सदियों तक हर प्रेमी के दिल और संगीत के हर मंच पर गूंजती रहेगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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