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‘कितने आदमी थे’ से लकेर ‘जो डर गया…’ तक, रमेश सिप्पी और ‘शोले’ के अमर डायलॉग्स की कहानी

Iconic scene from Sholay: रमेश सिप्पी की फिल्म ‘शोले’ ने हिंदी सिनेमा को अमर डायलॉग्स दिए. ‘कितने आदमी थे’ से लेकर ‘जो डर गया समझो मर गया’ तक, जानिए शोले और इसके निर्देशक की पूरी कहानी.

Ramesh Sippy Sholay film

Iconic scene from Sholay: बॉलीवुड इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी हैं, जो सिर्फ मनोरंजन नहीं करती, बल्कि अपनी कहानियों, किरदारों और डायलॉग्स से लोगों की यादों में हमेशा के लिए घर कर जाती हैं. ऐसी ही एक फिल्म है ‘शोले’, और इसके पीछे निर्देशक रमेश सिप्पी का अहम योगदान है. रमेश सिप्पी ने अपने करियर में कई सुपरहिट फिल्में बनाईं, लेकिन ‘शोले’ ने उनकी लोकप्रियता में चार चांद लगा दिए.

फिल्म के कुछ डायलॉग्स जैसे ‘जो डर गया, समझो मर गया’, ‘अब तेरा क्या होगा कालिया’ और ‘ये हाथ मुझे दे दे ठाकुर’ आज भी हर उम्र के दर्शकों की जुबां पर हैं. ये डायलॉग्स सिर्फ संवाद नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा की यादों का हिस्सा बन गए हैं.

रमेश सिप्पी का जन्मदिन

रमेश सिप्पी का जन्म 23 जनवरी 1947 को पाकिस्तान के कराची में हुआ. उनके पिता, गोपालदास परमानंद सिप्पी, जिन्हें जीपी सिप्पी कहा जाता है, बॉलीवुड के मशहूर निर्माता थे. विभाजन के बाद सिप्पी परिवार मुंबई आकर बस गया. बचपन से ही फिल्मी माहौल में पले-बढ़े रमेश ने महज 6 साल की उम्र में फिल्म ‘शहंशाह’ में बाल कलाकार के रूप में अभिनय किया. हालांकि, उन्होंने बड़े होकर एक्टिंग नहीं की, बल्कि अपने पिता के कदमों पर चलते हुए फिल्म निर्देशन की दुनिया में कदम रखा.

फिल्म ‘अंदाज’ से की करियर की शुरुआत

रमेश सिप्पी ने अपने करियर की शुरुआत 1971 में आई फिल्म ‘अंदाज’ से की. इस फिल्म में शम्मी कपूर और हेमा मालिनी जैसे सितारे थे और फिल्म को दर्शकों ने खूब पसंद किया. इसके बाद उन्होंने 1972 में ‘सीता और गीता’ बनाई, जिसमें हेमा मालिनी ने डबल रोल निभाया. यह फिल्म भी सफल रही और रमेश सिप्पी की पहचान एक कुशल निर्देशक के रूप में स्थापित हुई.

शोले की कहानी

1975 में आई उनकी सबसे बड़ी फिल्म ‘शोले’ ने बॉलीवुड की दिशा ही बदल दी. फिल्म में अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, जया भादुड़ी, हेमा मालिनी और संजीव कुमार जैसे दिग्गज कलाकार थे. अमजद खान ने ‘गब्बर’ के किरदार को ऐसा जीवंत बना दिया कि आज भी बच्चे और बड़े उसके डायलॉग्स दोहराते हैं. रमेश सिप्पी ने फिल्म के हर डायलॉग और किरदार को इस तरह डिजाइन किया कि वह समय की कसौटी पर खरा उतरा.

शुरुआत में कुछ आलोचकों ने फिल्म को लेकर नकारात्मक टिप्पणियां की थीं और कहा कि ये फिल्म इंडस्ट्री को नुकसान पहुंचा सकती है. लेकिन, जब फिल्म रिलीज हुई तो दर्शकों ने इसकी कहानी और डायलॉग्स को तुरंत अपना लिया और फिल्म लगातार पांच सालों तक सिनेमाघरों में चली.

रमेश सिप्पी के निर्देशन में ‘शोले’ के अलावा भी कई सुपरहिट फिल्में बनीं. उन्होंने ‘शक्ति’, ‘सागर’, ‘शान’ और ‘अकेला’ जैसी फिल्में बनाईं. ‘शक्ति’ में अमिताभ बच्चन और दिलीप कुमार जैसे सितारे एक साथ नजर आए. ‘सागर’ में ऋषि कपूर, डिंपल कपाड़िया और कमल हासन ने मुख्य भूमिका निभाई. इन फिल्मों ने भी दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाई, लेकिन ‘शोले’ की सफलता और लोकप्रियता किसी फिल्म की तुलना में अलग ही थी.


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पद्मश्री से सम्मानित

रमेश सिप्पी ने अपने करियर में कई पुरस्कार भी जीते. 2013 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया. उन्होंने न सिर्फ फिल्मों में योगदान दिया, बल्कि रमेश सिप्पी एकेडमी ऑफ सिनेमा एंड एंटरटेनमेंट की स्थापना करके नए फिल्ममेकरों को प्रशिक्षित भी किया. उनकी फिल्मों में तकनीकी नवाचार, बड़ी स्टार कास्ट, और मजबूत कहानी हमेशा प्रमुख रही.

-भारत एक्सप्रेस



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