सोशल मीडिया पर न केवल बॉलीवुड के एक्टर-एक्ट्रेस, बल्कि धर्म और आस्था से जुड़े संतो के वीडियो भी अक्सर वायरल होते रहते है. इसी बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का एक छोटा सा क्लिप कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शेयर किया जा रहा है. इसमें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इस्लाम से जुड़े विश्वासों का उल्लेख करते दिखते हैं. साथ ही वीडियो क्लिप में वो लोगों से कलमा पढ़ने को कह रहे हैं. लेकिन क्या ये वाकई सच है? क्या सच में उन्होंने कुछ ऐसा कहा है? आइए जानते है सच्चाई.
क्या हुआ वायरल?
दरअसल, 22 जनवरी को एक इंस्टाग्रम यूजर ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का एक छोटा क्लिप शेयर किया. इस वीडियो में वो इस्लाम से जुड़े विश्वासों का उल्लेख करते दिखते हैं, जिसे आधार मानकर ये कहा जा रहा है कि वो लोगों से कलमा पढ़ने को कहा है.

कुछ यूजर्स ने तो इसको शेयर करते हुए आपत्तिजनक और भड़काऊ भाषा का भी इस्तेमाल किया है.
जांच में क्या सामने आया?
फैक्ट चेक के दौरान यह साफ हुआ कि वायरल वीडियो ना तो हाल का है और ना ही उसे पूरे संदर्भ में दिखाया जा रहा है. यह वीडियो प्रयागराज विवाद से पहले का है और इसे एडिट करके सोशल मीडिया पर फैलाया गया है.
असल में, यह वीडियो 16 दिसंबर 2025 को एक फेसबुक पेज पर अपलोड किया गया था. लंबे और मूल वीडियो में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सनातन धर्म और इस्लाम के बीच दार्शनिक और धार्मिक अंतर समझा रहे हैं. वे यह स्पष्ट कर रहे हैं कि इस्लाम में मोक्ष या बहिश्त की अवधारणा कलमा और आस्था से जुड़ी मानी जाती है, जबकि सनातन परंपरा में कर्म और आचरण को निर्णायक माना जाता है.
वायरल क्लिप में वीडियो का वही हिस्सा काटकर दिखाया गया है, जहां वे इस्लामिक मान्यताओं की व्याख्या कर रहे थे. इस हिस्से को संदर्भ से अलग कर ऐसा पेश किया गया, जैसे वे खुद कलमा पढ़ने की अपील कर रहे हों. जबकि पूरे वीडियो में वे साफ कहते हैं कि सनातन धर्म न्याय और कर्म आधारित है, जहां व्यक्ति का आचरण ही उसके फल का आधार होता है.
प्रयागराज विवाद से क्यों जोड़ा गया?
यह वीडियो ऐसे समय वायरल हुआ है, जब माघ मेला और मौनी अमावस्या स्नान को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच विवाद की खबरें सामने आईं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस द्वारा उनके काफिले को रोके जाने के बाद तनाव की स्थिति बनी थी. इसी पृष्ठभूमि में पुराने वीडियो को नए विवाद से जोड़कर फैलाया गया.
रिपोर्टर्स और मीडिया की पुष्टि
प्रयागराज में इस मामले को कवर करने वाले पत्रकारों ने भी वीडियो को एडिटेड और भ्रामक बताया है. किसी भी भरोसेमंद न्यूज रिपोर्ट में यह नहीं कहा गया है कि शंकराचार्य ने कलमा पढ़ने की अपील की हो.
जांच से ये बात साफ हो गई कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा दावा गलत और भ्रामक है. शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का वीडियो संदर्भ से काटकर पेश किया गया है. वे किसी से कलमा पढ़ने को नहीं कह रहे थे, बल्कि दो धर्मों की मान्यताओं के बीच अंतर समझा रहे थे.
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-भारत एक्सप्रेस
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