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गरबा करती लड़कियों के वीडियो वायरल, भद्दे कमेंट्स की लगी झड़ी; जानें तस्वीरों का सच

देशभर में नवरात्र, गरबा और डांडिया की धूम के बीच सोशल मीडिया पर एक डरावना ट्रेंड देखने को मिल रहा है. गरबा के पारंपरिक परिधानों में डांस करती लड़कियों की तस्वीरों और वीडियोज पर कुछ लोग अश्लील, आपत्तिजनक और अमर्यादित टिप्पणियां कर रहे हैं. जानें सच

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पूरे देश में नवरात्र, गरबा और डांडिया की धूम मची हुई है. लेकिन इस बीच सोशल मीडिया पर एक चिंताजनक और डरावना ट्रेंड सामने आ रहा है. गरबा के पारंपरिक और रंग-बिरंगे परिधानों में डांस करती लड़कियां अपनी तस्वीरे और वीडियो सोशल मीडिया पर भी डाल रही है. लेकिन इसी बीच एसी कुछ ऐसी भी तस्वीरे आ रही है, जिन्हें शेयर कर लड़कियों के बारे में आपत्तिजनक, अश्लील और अमर्यादित टिप्पणियां कर रहे हैं. लेकिन असल सच्चाई कुछ और ही है.

क्या है सच?

जांच में इस बात का बड़ा खुलासा हुआ है कि इस पूरे खेल के पीछे कई फर्जी AI इन्फ्लुएंसर्स और उनके अकाउंट्स एक्टिव हैं. ये फर्जी अकाउंट्स त्योहारों और बड़े आयोजनों का फायदा उठाकर आपत्तिजनक कपड़े पहने हुए तस्वीरें पोस्ट करते हैं.

इसके पीछे का असली मकसद यूज़र्स को अपने जाल में फंसाकर टेलीग्राम चैनल्स या पेड सब्सक्रिप्शन तक पहुंचाना होता है, जहाँ 150 रुपये से लेकर 10 हजार रुपये तक में अश्लील कंटेंट बेचा जा रहा है. फीफा वर्ल्ड कप और सीजेपी के प्रदर्शनों के दौरान भी इसी तरह के AI वीडियो वायरल किए गए थे.

असली वीडियो से छेड़छाड़

यह फर्जीवाड़ा केवल AI से नई तस्वीरें बनाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि असली लड़कियों के गरबा वीडियो चुराकर भी उनमें AI की मदद से अश्लील बदलाव किए जा रहे हैं. उदाहरण के लिए वडोदरा की कई रियल कंटेंट क्रिएटर्स के असली गरबा डांस वीडियो को एडिट कर भ्रामक बना दिया गया. हाल ही में गुजरात पुलिस ने गरबा खेलती महिलाओं के वीडियो एडिट कर इंस्टाग्राम पर पोस्ट करने के मामले में तीन नाबालिगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई भी की है.

ऐसे पहचानें असली और AI का फर्क

यदि आप सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो देख रहे हैं, तो थोड़ी सी सतर्कता से AI की गलतियों को पकड़ सकते हैं. उदाहरण के लिए, एक वायरल वीडियो में लड़की के हाथ में अचानक तीन कंगन से दो कंगन हो जाते हैं. वहीं एक तस्वीर में गले के हार के डिजाइन अलग-अलग दिखते हैं. मेटा, गूगल के सिंथआईडी और हाइव मॉडरेशन जैसे AI डिटेक्शन टूल्स ने भी इन तस्वीरों को पूरी तरह फेक पाया है.

सोशल मीडिया पर बिना सोचे-समझे ऐसे फेक वीडियो पर भद्दे कमेंट्स करना न सिर्फ कानूनी जुर्म है, बल्कि यह किसी भी सम्मानजनक समाज के लिए बेहद शर्मनाक है. इसलिए इंटरनेट पर किसी भी वीडियो या तस्वीर पर भरोसा करने से पहले उसकी सच्चाई जांचना बेहद जरूरी है.

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-भारत एक्सप्रेस



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