लद्दाख में हाल ही में राज्य का दर्जा और भारतीय संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए थे. इसके दौरान लद्दाख के भाजपा कार्यालय को आग के हवाले कर दिया गया था और पुलिस के साथ झड़प में चार लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद आंदोलन के प्रमुख कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार कर जोधपुर जेल भेज दिया गया. इसी बीच सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे लद्दाख का बताकर दावा किया जा रहा की प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारत पर कब्जा कर लिया है.
क्या है दावा?

यह वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अलग-अलग कैप्शन के साथ शेयर किया गया. इंस्टाग्राम के एक यूजर ने इसको पोस्ट करते हुए लिखा, “यह नेपाल नहीं, लद्दाख है… संघर्ष का आगाज पहाड़ों से हुआ है.” हालांकि, जांच में यह दावा गलत साबित हुआ.
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क्या है सच?
जब हमने इस वीडियो की सच्चाई जानने के लिए इसकी जांच की, तो कई अहम तथ्य सामने आए. हमने वीडियो के कुछ कीफ्रेम्स निकालकर गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया, जिसमें यह वीडियो 13 सितंबर 2025 के एक फेसबुक पोस्ट में मिला. जिसमें लिखा था कि यह वीडियो नेपाल का है. यह भी स्पष्ट हुआ कि लद्दाख में प्रदर्शन 24 सितंबर को हुए थे, जबकि यह वीडियो उससे कई दिन पहले इंटरनेट पर अपलोड किया गया था.
साथ ही वायरल वीडियो में दिखाई दे रही इमारत की लोकेशन की जांच करने पर वह नेपाल के चितवन जिले के जिला प्रशासन कार्यालय से मेल खाती पाई गई. जब गूगल मैप पर दोनों इमारतों की तस्वीरों की कम्पेयर किया गया तो दोनों पूरी तरह से एक जैसी दिखी, जिससे इस बात की पुष्टि हो गई की ये वीडियो नेपाल का है.
निष्कर्ष
वायरल वीडियो लद्दाख का नहीं बल्कि नेपाल का है. इसे लद्दाख का बताकर सोशल मीडिया पर भ्रामक दावा फैलाया जा रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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