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वाराणसी प्रवचन में अचानक हमला… वायरल तस्वीर ने बढ़ाया रहस्य, क्या है असली सच?

Fact Check: वाराणसी में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गोरक्षा यात्रा के दौरान मधुमक्खियों ने हमला किया. सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर की क्या हकीकत है, जानिए.

Fact Check: वाराणसी के रोहनिया क्षेत्र में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गोरक्षा यात्रा के दौरान प्रवचन हो रहा था. इसी बीच अचानक मधुमक्खियों का झुंड वहां मौजूद लोगों पर टूट पड़ा. इस हमले से अफरा-तफरी मच गई और कई श्रद्धालु घायल हो गए. स्वामी जी को भी अपना प्रवचन बीच में ही रोकना पड़ा.

सोशल मीडिया पर तस्वीर वायरल

घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक तस्वीर तेजी से वायरल हुई. इसमें दिखाया गया कि मधुमक्खियां सीधे शंकराचार्य पर हमला कर रही हैं. कई यूजर्स ने इस तस्वीर को सच मानकर शेयर किया और स्वामी जी पर तंज कसते हुए पोस्ट लिखे.

पड़ताल में सामने आई सच्चाई

भारत एक्सप्रेस न्यूज ने इस तस्वीर की गहराई से जांच की. गूगल रिवर्स इमेज सर्च और एआई डिटेक्शन टूल्स की मदद से पता चला कि यह तस्वीर असली नहीं है. इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार किया गया है. ‘Sight Engine’ टूल ने 88 फीसदी तक एआई जनरेटेड होने के संकेत दिए, जबकि ‘Undetectable’ टूल ने भी यही पुष्टि की.

मीडिया रिपोर्ट्स से पुष्टि

एक रिपोर्ट में बताया गया कि 13 मई 2026 को रोहनिया में प्रवचन के दौरान मधुमक्खियों ने हमला किया था. एक प्रमुख रिपोर्ट में भी 14 मई को प्रकाशित खबर में लिखा कि दरेखू स्थित प्राचीन शिव मंदिर परिसर में कार्यक्रम के दौरान मधुमक्खियों का झुंड अचानक ग्रामीणों पर टूट पड़ा. इन रिपोर्ट्स में कहीं भी वायरल तस्वीर जैसी कोई बात नहीं थी.

शिष्य ने क्या कहा?

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के करीबी शिष्य मुकुदानंद ने भी वायरल तस्वीर को फर्जी बताया. उन्होंने कहा कि मधुमक्खियों का हमला जरूर हुआ था लेकिन सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही तस्वीर असली नहीं है.

संदर्भ और यात्रा

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इन दिनों गोरक्षा अभियान के तहत 81 दिन की यात्रा पर हैं. इसी यात्रा के दौरान 13 मई को रोहनिया में कार्यक्रम रखा गया था, जहां यह घटना हुई.

वायरल पोस्ट की जांच

फर्जी तस्वीर शेयर करने वाले फेसबुक यूजर के प्रोफाइल की भी जांच की गई. पता चला कि उसके तीन हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं और अकाउंट 2009 में बनाया गया था.

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जांच में साफ हो गया कि वायरल तस्वीर एआई से बनाई गई है. असली घटना में मधुमक्खियों ने हमला किया था लेकिन सोशल मीडिया पर फैली तस्वीर काल्पनिक है. इस तरह यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि बिना जांच के वायरल कंटेंट पर भरोसा करना गलत है.

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-भारत एक्सप्रेस



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