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नीदरलैंड में मोदी का ‘इकोनॉमिक मिशन’! सेमीकंडक्टर से क्लीन एनर्जी तक, जानें भारत-डच साझेदारी के क्या हैं मायने

Narendra Modi के नीदरलैंड दौरे को भारत-यूरोप आर्थिक रिश्तों के लिए बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है. सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी और जल प्रबंधन जैसे सेक्टर्स में डच निवेश भारत के ‘मेक इन इंडिया’ मिशन को नई रफ्तार दे सकता है…

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PM Modi Netherlands Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने 5 देशों के महा-दौरे के दूसरे अहम पड़ाव पर नीदरलैंड (Netherlands) पहुंचे चुके हैं, जहां हेग और एम्स्टर्डम में प्रवासी भारतीयों ने उनका शानदार स्वागत किया. बताते चलें भारत-यूरोपीय संघ (EU) के बीच हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बाद यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला बड़ा यूरोपीय दौरा है.

इसको लेकर बिजनेस एक्सपर्ट्स का मानना है कि पीएम मोदी की डच प्रधानमंत्री रॉब जेटेन, राजा विलेम अलेक्जेंडर और महारानी मैक्सिमा के साथ होने वाली यह मुलाकात भारत के टेक, सेमीकंडक्टर और क्लीन एनर्जी सेक्टर की पूरी तस्वीर बदल सकती है.

भारत के पक्ष में झुक रहा है व्यापार का तराजू

भारत और नीदरलैंड के बीच आर्थिक रिश्ते कितने मजबूत हैं, इसका अंदाजा दोनों देशों के बीच होने वाले सालाना व्यापार के आंकड़ों से लगाया जा सकता है. खास बात यह है कि इस व्यापार में भारत बहुत फायदे की स्थिति (Trade Surplus) में है, बता दें कि दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 2.5 लाख करोड़ रुपये का है.

भारत का नीदरलैंड को निर्यात: 1.59 लाख करोड़ रुपये

(मुख्य उत्पाद: पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, लाइफ-सेविंग दवाइयां, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, ऑर्गेनिक केमिकल्स, टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट्स और स्टील)

नीदरलैंड से भारत का आयात: 45 हजार करोड़ रुपये

(मुख्य उत्पाद: हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, मेडिकल और वैज्ञानिक उपकरण, एडवांस मशीनरी, प्लास्टिक रॉ मैटेरियल, केमिकल्स और डेयरी उद्योग की मशीनें)

वहीं ज्ञात रहे भारत-ईयू एफटीए (FTA) लागू होने के बाद इस बात की पूरी संभावना है कि डच कंपनियां भारत में अपने निवेश को दोगुना करेंगी, जिससे भारतीय एक्सपोर्टर्स को पूरे यूरोप का बाजार टैक्स-फ्री या बेहद कम शुल्क पर मिल सकेगा.

डच सेमीकंडक्टर और ‘मेक इन इंडिया’ का मिलन

इस पूरे दौरे (PM Modi Netherlands Visit) का सबसे हॉट टॉपिक है सेमीकंडक्टर (Chip Manufacturing). नीदरलैंड दुनिया की सबसे एडवांस सेमीकंडक्टर चिप बनाने वाली मशीनों (जैसे ASML कंपनी) का गढ़ है. पीएम मोदी की कोशिश है कि डच कंपनियों को भारत के ‘सेमीकंडक्टर मिशन’ से जोड़ा जाए. अगर नीदरलैंड की टेक कंपनियां भारत में अपनी चिप डिजाइनिंग या कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाती हैं, तो भारत आने वाले समय में इलेक्ट्रॉनिक्स के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो जाएगा.

डच तकनीक बदलेगी भारत की सूरत(PM Modi Netherlands Visit)

नीदरलैंड का एक बड़ा हिस्सा समुद्र तल से नीचे है, इसलिए उनके पास दुनिया की सबसे बेहतरीन जल प्रबंधन (Water Management) और बाढ़ नियंत्रण तकनीक है. भारत अपनी नदियों की सफाई, शहरी जल प्रबंधन और पोर्ट डेवलपमेंट (बंदरगाहों के विकास) के लिए डच एक्सपर्ट्स के साथ बड़े करारों पर दस्तखत कर सकता है.

इसके अलावा, ग्रीन हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) के क्षेत्र में भी दोनों देश मिलकर अरबों डॉलर के निवेश की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं.

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कूटनीति के पीछे बड़ा आर्थिक एजेंडा

एम्स्टर्डम एयरपोर्ट पर पीएम मोदी का स्वागत करने के लिए डच विदेश मंत्री टॉम बेरेंडसेन और चीफ ऑफ मिलिट्री हाउसहोल्ड रियर एडमिरल लुडगर ब्रुमेलार खुद मौजूद थे. यूरोपीय नेताओं की यह गर्मजोशी दिखाती है कि यूरोप मंदी के इस दौर में भारत को एक सबसे बड़े और स्थिर बाजार (Stable Market) के रूप में देख रहा है. पीएम मोदी ने भी ‘एक्स’ पर साफ किया कि यह यात्रा दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को एक नई ऐतिहासिक ऊंचाई पर ले जाएगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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