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बकरीद से पहले बंगाल में गोवंश की कुर्बानी पर रोक, वायरल वीडियो का सच निकला कुछ और

Fact Check: बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने गोवंश कटान पर रोक लगाई. इसी दौरान सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को बंगाल से जोड़कर दावा किया गया लेकिन जांच में कुछ और निकला.

Fact Check: पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार ने बकरीद से पहले गोवंश कटान को लेकर सख्त नियम लागू किए. 13 मई 2026 को जारी अधिसूचना में कहा गया कि 14 साल से कम उम्र के किसी भी पशु का वध नहीं होगा और कटान केवल प्रशासन द्वारा तय वधशालाओं में ही किया जा सकेगा. नियम तोड़ने वालों पर जेल और जुर्माने की चेतावनी भी दी गई. इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें गाड़ियों में गायें लदी दिख रही थीं. दावा किया गया कि बंगाल के मुसलमानों ने हिंदू व्यापारियों से गोवंश खरीदने से इनकार कर दिया और इस बार गाय की कुर्बानी नहीं करेंगे.

वायरल वीडियो की असलियत

भारत एक्सप्रेस न्यूज ने इस वीडियो की जांच की. कीफ्रेम्स निकालकर गूगल लेंस से खोज की गई तो पता चला कि यह क्लिप बांग्लादेश के जशोर जिले के चौगाछा उपजिले के चौगाछा हाट का है. एक यूट्यूब चैनल ने इसे 18 मई 2026 को अपलोड किया था. वीडियो में दिखा कि ईद से पहले बाजार में बड़ी संख्या में गोवंश लाए गए थे. इसमें वह बयान नहीं था, जो सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा था.

भाषा समझने की कोशिश

वीडियो की भाषा समझने के लिए गूगल जेमिनी एआई का सहारा लिया गया. इसमें एक व्यक्ति बंगाली में कहता सुनाई दिया कि यहां मत रुको, अपनी माता को घर ले जाओ, यहां लोग कुर्बानी के लिए ही खरीदते हैं. असल वीडियो में यह कथन मौजूद नहीं था. यह एडिटेड क्लिप थी, जिसे गलत संदर्भ में फैलाया गया.

बांग्लादेशी बाजार की पुष्टि

बांग्लादेश के ‘Beautiful Videos BD’ चैनल पर 16 मार्च 2026 को अपलोड वीडियो में वही दृश्य दिखा. यह चौगाछा पशु बाजार का था, जो हफ्ते में दो दिन लगता है. गाड़ियों और लोगों की समानता से साफ हो गया कि वायरल वीडियो बंगाल का नहीं बल्कि बांग्लादेश का है. स्थानीय व्यापारी ने भी पुष्टि की कि यह फुटेज चौगाछा बाजार का ही है.

मुस्लिम धर्मगुरुओं की सलाह

पश्चिम बंगाल में अधिसूचना के बाद मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी समुदाय को सलाह दी कि बकरीद पर गाय की कुर्बानी न करें. उन्होंने कहा कि गोवंश की खरीदारी से बचें और बीफ खाना बंद करें. साथ ही केंद्र सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग भी उठाई. उनका कहना था कि इससे ग्वाला समुदाय प्रभावित होगा, जो त्योहार के दौरान दूध न देने वाले पशुओं को बेचता है.

सोशल मीडिया अकाउंट की पड़ताल

वायरल वीडियो शेयर करने वाले एक्स यूजर का अकाउंट अगस्त 2025 में बना था और कई बार यूजरनेम बदला गया. उसके 10 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. जांच में पता चला कि वीडियो एडिट करके गलत दावे के साथ पोस्ट किया गया.

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स्पष्ट है कि वायरल वीडियो बंगाल का नहीं बल्कि बांग्लादेश का है. इसे एडिट कर झूठे दावे के साथ फैलाया गया. हालांकि, बंगाल सरकार की अधिसूचना के बाद मुस्लिम धर्मगुरुओं ने समुदाय को गाय की कुर्बानी से दूर रहने की सलाह दी है.

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-भारत एक्सप्रेस



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