MP News: इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल (Maharaja Yeshwantrao Hospital) में देवास से रेफर की गई एक नवजात की बुधवार (3 सितंबर) दोपहर चूहों के काटने से मौत हो गई. इससे पहले खंडवा की भी एक और बच्ची के इसी तरह मौत हुई थी.
खंडवा की लक्ष्मी और देवास की रेहाना दोनों परिवार राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में उम्मीद लेकर आए थे. दोनों ही परिवार अपने साथ केवल दुख लेकर लौटे. हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों की मौत चूहों के काटने से नहीं, बल्कि जन्मजात समस्याओं के कारण हुई है.
एमवाय अस्पताल के अधीक्षक अशोक यादव ने कहा, “दोनों बच्चों को जन्मजात एनीमिया था और उन्हें बाहर से रेफर किया गया था. एक का वजन 1 किलो और दूसरे का 1.6 किलो था और हीमोग्लोबिन भी कम था. बच्चों पर काटने के निशान थे, लेकिन इनसे मौत नहीं हुई. एक की मौत हो गई, जबकि दूसरे की हालत गंभीर है और उसकी आंतें अविकसित थीं.”
उपाधीक्षक डॉ. जितेंद्र वर्मा ने कहा, “इस बच्ची को जन्मजात एनीमिया था, हाथों में विकृति थी और सात दिन पहले उसका ऑपरेशन हुआ था. तीन-चार दिनों तक उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, इसलिए उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था. उंगली पर चूहे के काटने का निशान मामूली था. मौत जन्मजात एनीमिया के कारण हुई. 15 दिन की इस बच्ची का वजन कम था.”
अस्पताल के कर्मचारियों ने माना एक बड़ा चूहा घुम रहा था
इन सब बयानबाजी के बीच इस बड़े सवाल का जवाब नहीं मिलता कि नवजात शिशुओं को नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में चूहों के लिए असुरक्षित क्यों छोड़ दिया गया?
अस्पताल के कर्मचारियों ने स्वीकार किया कि एक बड़ा चूहा कई दिनों से NICU में घूम रहा था. इस अस्पताल के अलावा पास के नेहरू बाल चिकित्सालय, कैंसर अस्पताल और टीबी केंद्र के गलियारों में भी चूहे घूम रहे हैं.
अस्पताल प्रबंधन ने इसके लिए बारिश और पानी की वजह से गए बिलों को ज़िम्मेदार ठहराया. सच्चाई यह भी है कि मरीज़ों के तीमारदारों द्वारा लाए गए खुले खाने के थैलों से भी अस्पताल में चूहें के लिए एक मुफ्त दावत बना रहे हैं.
दो नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित किया गया
डैमेज कंट्रोल करते हुए मध्य प्रदेश सरकार में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा, “यह एक गंभीर मामला है, जिस पर तुरंत कार्रवाई की गई है. अगर समय पर कीट नियंत्रण किया गया होता, तो चूहे नहीं होते. कीट नियंत्रण एजेंसी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है और बर्खास्तगी का नोटिस जारी किया गया है. नर्सिंग अधीक्षक को हटा दिया गया है, दो नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है और शिशु रोग विभाग के विभागाध्यक्ष को नोटिस दिया गया है.”
वहीं विपक्ष ने सरकार के इस एक्शन को दिखावा करार दिया और कहा कि बच्चों को नुकसान चूहे ने नहीं, बल्कि भ्रष्ट प्रशासन ने पहुंचाया है.
बच्चों को चुहों ने नहीं, भ्रष्ट प्रशासन ने मारा
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, “बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाले चूहे नहीं, बल्कि भ्रष्ट प्रशासन है. यही भाजपा का असली चेहरा है. अगर सरकार में हिम्मत है, तो वह अधीक्षक और स्वास्थ्य मंत्री को हटाए, न कि केवल छोटे कर्मचारियों को. इतने बड़े चूहे बच्चों को खा रहे हैं, जबकि राजनेता भ्रष्टाचार से पल रहे हैं.”
यह पहली बार नहीं है जब चूहों ने मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की बदहाली उजागर की है. इससे पहले केवल 2023 में ही कई मुर्दाघरों में ऐसी ही भयावह घटनाएं सामने आईं.
भोपाल के हमीदिया अस्पताल में एक 50 वर्षीय व्यक्ति के शव को चुहों ने कुतर दिया गया, विदिशा जिला अस्पताल में एक 70 वर्षीय दुर्घटना पीड़ित की नाक और हाथ कुतर दिए गए और सागर जिला अस्पताल में दो शवों की आंखें खा ली गईं.
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-भारत एक्सप्रेस
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