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गांवों की तरक्की की नई मिसाल, MGNREGA को मिला अब तक का सबसे बड़ा बजट

मोदी सरकार ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि गांव और ग्रामीण भारत देश की असली ताकत हैं. वित्त वर्ष 2025-26 के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को 86,000 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक बजट मिला है.

मोदी सरकार ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि गांव और ग्रामीण भारत देश की असली ताकत हैं. वित्त वर्ष 2025-26 के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को 86,000 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक बजट मिला है जो अब तक का सबसे बड़ा आवंटन है. यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं बल्कि सरकार की उस सोच का प्रतीक है जिसमें गांवों को आत्मनिर्भर भारत की नींव माना गया है.

जुलाई 2025 तक 45,783 करोड़ रुपये जारी

सरकार ने जुलाई 2025 तक 45,783 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं जिसमें से 37,912 करोड़ रुपये सिर्फ मजदूरी के भुगतान के लिए हैं. इसका मतलब है कि अब ग्रामीण मजदूरों को अपनी मेहनत की कमाई के लिए महीनों इंतजार नहीं करना पड़ता पैसा समय पर और पारदर्शी तरीके से उनके खाते में पहुंच रहा है.

MGNREGA सम्मान और आत्मनिर्भरता की गारंटी

MGNREGA अब सिर्फ रोजगार देने वाली योजना नहीं रही बल्कि यह सम्मान और आत्मनिर्भरता की गारंटी बन गई है. 2024-25 में इस योजना के तहत 290.60 करोड़ व्यक्ति-दिवस का रोजगार मिला और करीब 16 करोड़ परिवारों को इसका लाभ पहुंचा. खास बात ये रही कि काम मांगने वाले 99.79 प्रतिशत परिवारों को काम मिला यानी योजना ने लोगों की जरूरतों को सही समय पर पूरा किया.

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इससे गांवों में पलायन भी कम हुआ है. लोग अब अपने गांव में ही रहकर काम कर पा रहे हैं जिससे स्थानीय विकास को भी बढ़ावा मिला है. और सबसे बड़ी बात महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है. अब महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं.

MGNREGA आज गांवों के लिए सिर्फ एक योजना नहीं बल्कि उम्मीद की किरण बन चुकी है.

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-भारत एक्सप्रेस



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