JNU Suspend MoU Inonu University: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की कुलपति (वीसी) शांतिश्री धुलीपुडी पंडित ने गुरुवार को कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर चिंताओं के कारण तुर्की के इनोनू विश्वविद्यालय के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) को निलंबित कर दिया है. उन्होंने कहा कि प्रशासन ने ऐसे देश के साथ संबंध नहीं रखने का फैसला किया है जो “आतंकवाद का समर्थन करता है और भारत की पीठ में छुरा घोंपता है.”
वीसी शांतिश्री धुलीपुडी पंडित ने कहा,
हमारे पास विभिन्न देशों के साथ 98 समझौता ज्ञापन हैं. जेएनयू तुर्की भाषा पढ़ाता है. प्रशासन ने सोचा कि हमें ऐसे देश के साथ कोई संबंध नहीं रखना चाहिए जो आतंक का समर्थन करता है और भारत की पीठ में छुरा घोंपता है. इसी वजह से मुझे लगा कि हमारे लिए भारतीय सशस्त्र बलों के साथ खड़ा होना महत्वपूर्ण है.
उन्होंने कहा, “हर नागरिक हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है… जेएनयू पूरी तरह से भारतीय करदाताओं द्वारा सब्सिडी प्राप्त है. हमारी वफादारी कहाँ होनी चाहिए? भारतीय राज्य के प्रति. सशस्त्र और नौसेना कर्मचारियों के वर्तमान प्रमुख जेएनयू के पूर्व छात्र हैं. हम उन्हें सलाम करते हैं. जेएनयू हमेशा देश और हमारे सशस्त्र बलों के लिए है.”
दुनिया अब हमारी हवाई शक्ति को स्वीकार कर रही
भारतीय सेना द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर पर बोलते हुए जेएनयू कुलपति ने कहा, “मैं भारतीय सेना और भारतीय वैज्ञानिकों को बधाई देता हूं क्योंकि यह पहली बार है जब किसी प्रधानमंत्री ने राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई है. ऐसा नहीं है कि पहले हमारे पास तकनीक नहीं थी, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति और निर्णायक फैसले को साथ जोड़ना होगा. हमारे पास क्षमता थी, लेकिन मैं इसे दुनिया को दिखाने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी को सलाम करती हूं. दुनिया आज स्वीकार कर रही है कि भारत के पास बेजोड़ हवाई शक्ति है और वे भारत में बने हैं.”
भारत लंबे समय से आतंकवाद का शिकार है
पहलगाम आतंकी हमले में पाकिस्तान की संलिप्तता पर बोलते हुए जेएनयू के कुलपति ने कहा कि भारत लंबे समय से आतंकवाद का शिकार रहा है. उन्होंने कहा कि पहलगाम में हुई हत्याएं “बर्बर” थीं क्योंकि कोई भी धर्म इस प्रकार के “धार्मिक बहिष्कारवादी रूढ़िवाद” का प्रचार नहीं करता.
वीसी ने कहा, “इसमें पाकिस्तान की निश्चित रूप से संलिप्तता है. इसमें कोई संदेह नहीं है. भारत सबसे लंबे समय से आतंकवाद का शिकार रहा है. उस दिन उन्होंने जो किया वह बर्बर था और हर सभ्य देश द्वारा इसकी निंदा की जानी चाहिए. कोई भी धर्म इस प्रकार के धार्मिक बहिष्कारवादी रूढ़िवाद का प्रचार नहीं करता. इसकी निंदा की जानी चाहिए. मुझे बहुत खुशी है कि हमने भी संयम के साथ और अपनी पसंद के अनुसार जवाबी कार्रवाई की. यह बहुत महत्वपूर्ण है.”
तुर्किये के उत्पादों का देश में बहिष्कार
भारत भर के व्यापारियों ने भी पाकिस्तान के आतंकवादी ढांचे को बेअसर करने के लिए भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्किये द्वारा पाकिस्तान को समर्थन दिए जाने के बाद तुर्कीये के उत्पादों का बहिष्कार करने का फैसला किया है. हिमाचल प्रदेश के किसान संगठनों ने भी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से तुर्कीये से सेब के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और अन्य देशों से आने वाले सेबों पर सख्त आयात शुल्क और गुणवत्ता मानकों को लागू करने का आह्वान किया है.
-भारत एक्सप्रेस
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