कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली में हुए संसद मार्च के बाद बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि उनका संगठन अब दोबारा संसद मार्च निकालने की योजना नहीं बनाएगा. दीपके का कहना है कि उन्हें आशंका है कि अगर फिर से ऐसा कोई मार्च किया गया तो पुलिस युवाओं के खिलाफ उसी तरह की कार्रवाई कर सकती है, जैसी सोमवार (20 जुलाई, 2026) को देखने को मिली है.
दिल्ली में सोमवार को हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प को लेकर दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावा किया जा रहा हैं. अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया कि प्रदर्शन को नियंत्रित करने के नाम पर जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया गया. उनका दावा है कि पुलिसकर्मियों ने छात्रों और युवा प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की.
दीपके ने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई बेहद कठोर थी और कई युवाओं को चोटें आईं. उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान कुछ नाबालिग लड़कियां भी घायल हुईं और एक लड़की को गर्दन में गंभीर चोट लगी, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया. दीपके का कहना है कि अगर उस लड़की की हालत बिगड़ती है तो इसकी जिम्मेदारी पुलिस और सरकार की होगी.
उन्होंने पुलिस की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्थिति संभालने के लिए लाठीचार्ज के बजाय दूसरे तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता था. उनका कहना था कि अगर पुलिस प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकना चाहती थी तो वॉटर कैनन जैसे विकल्प अपनाए जा सकते थे. दीपके ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल अधिकतर युवा 17-18 साल के थे और संगठन पिछले एक महीने से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहा था.
पुलिस कार्रवाई और पत्थरबाजी को लेकर अलग-अलग दावे
सोमवार के प्रदर्शन के बाद सामने आई जानकारी के मुताबिक, पुलिस कार्रवाई में करीब 60 से 70 प्रदर्शनकारियों के घायल होने की बात कही गई है. वहीं, प्रदर्शनकारियों की ओर से हुई पत्थरबाजी में 100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के घायल होने का दावा किया गया है.
अभिजीत दीपके ने पुलिस की मौजूदगी और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन स्थल के आसपास भारी सुरक्षा थी और प्रदर्शनकारियों की लगातार जांच की जा रही थी. ऐसे में वहां पत्थरों से भरे ट्रक पहुंचना कई सवाल खड़े करता है.
उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी घटना पहले से तय योजना का हिस्सा हो सकती है. दीपके ने कहा कि जब हर व्यक्ति की तलाशी ली जा रही थी, बैग और सामान तक चेक किए जा रहे थे और बैरिकेड लगाकर आवाजाही नियंत्रित की गई थी, तो फिर प्रदर्शन स्थल के पास पत्थर कैसे पहुंचे, इसका जवाब पुलिस को देना चाहिए.
हालांकि, इस पूरे मामले में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के दावों में अंतर बना हुआ है. जहां प्रदर्शनकारी पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगा रहे हैं, वहीं पुलिस की ओर से भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है. फिलहाल घटना को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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