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वामपंथ के गढ़ में ABVP का कब्जा! हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी चुनाव में दर्ज की शानदार जीत, NSUI को मिले नोटा से भी कम वोट

ABVP Wins Hyderabad University Election: हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव पर लंबे समय से वामपंथी और दलित छात्र संगठनों का कब्जा रहा है. ऐसे में ये नतीजे ABVP के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं माने जा रहे हैं.

ABVP Wins Hyderabad University Election

ABVP Wins Hyderabad University Election: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव (DUSU) में प्रचंड जीत के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने हैदराबाद में भी अपना परचम लहरा दिया है. ABVP ने हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी (HCU) के छात्रसंघ चुनाव में सभी प्रमुख पदों पर जीत हासिल की. वहीं कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI का छात्रसंघ चुनाव में प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा.

हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव पर लंबे समय से वामपंथी और दलित छात्र संगठनों का कब्जा रहा है. ऐसे में ये नतीजे ABVP के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं माने जा रहे हैं.

ABVP से इन्होंने जीता चुनाव

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के शिवा पालेपू HCU छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए हैं. वहीं उपाध्यक्ष पद पर देवेंद्र ने जीत हासिल की है. महासचिव पद पर श्रुति ने कब्जा किया है. संयुक्त सचिव और खेल सचिव के पद पर क्रमश: सौरभ शुक्ला और ज्वाला प्रसाद को जीत मिली. वहीं सांस्कृतिक सचिव पद पर वीनस ने जीत हासिल की.

ABVP ने ना सिर्फ पदाधिकारी पदों पर बल्कि काउंसलर और बोर्ड सदस्य के पदों पर भी जबरदस्त प्रदर्शन किया.

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6 सालों से वामदलों के कब्जे में था छात्रसंघ

पिछले छह सालों से हैदहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी पर वामदलों और दलित संगठनों का कब्जा बना हुआ था. कांग्रेस से जुड़े NSUI और दलित संगठनों के गठजोड़ की वजह से ABVP की राह हमेशा से मुश्किल रही. लेकिन इस बार नतीजे काफी चौंकाने वाले रहे.

कांग्रेस की NSUI को नोटा से भी कम वोट मिले

इस छात्रसंघ चुनाव में सबसे चौंकाने वाले नतीजे कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI का रहा. NSUI को इस बार नोटा से भी कम वोट मिले. जबकि राज्य में कांग्रेस की ही सरकार है.

जीत के बाद ABVP के प्रवक्ता अंतरिक्ष ने मीडिया से कहा कि ये जीत छात्रों की राष्ट्रवादी सोच की जीत है. यह जीत विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ छात्रों की एकजुटता की जीत है. वामपंथ के गढ़ में ABVP की जीत यह दिखाती है कि छात्र अब वैचारिक दबाव से मुक्त होना चाहते हैं.

– भारत एक्सप्रेस



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