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अजित पवार के निधन के बाद NCP में ‘महा-विलय’ का प्लान फेल, 8 फरवरी को होने वाला था बड़ा ऐलान, जयंत पाटिल ने किया खुलासा

अजित पवार के असामयिक निधन ने महाराष्ट्र की राजनीति में सन्नाटा तो भर दिया है, लेकिन पर्दे के पीछे शरद पवार के साथ एनसीपी के एकीकरण की बातचीत अंतिम दौर में थी. 8 फरवरी को विलय का औपचारिक ऐलान होना था, जिससे सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल सकता था.

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NCP Merger Plan: महाराष्ट्र की राजनीति में इस वक्त जो हलचल मची है, उसने हर किसी को हैरान कर दिया है. डिप्टी सीएम अजित पवार के अचानक हुए निधन के बाद से राज्य के सियासी गलियारों में सन्नाटा तो है, लेकिन पर्दे के पीछे ‘सत्ता के समीकरण’ बदलने की तैयारी भी जोरों पर है. अब तक कयास लगाए जा रहे थे कि क्या शरद पवार और अजित पवार के गुट फिर से एक होंगे? अब इन चर्चाओं पर एनसीपी के बड़े नेताओं ने मुहर लगा दी है.

8 फरवरी को होने वाला था ‘महा-विलय’

इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया है. खबर है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुट आगामी 8 फरवरी को विलय यानी एक होने का आधिकारिक ऐलान करने वाले थे. लेकिन अजित पवार के असामयिक निधन ने इस पूरी प्लानिंग पर पानी फेर दिया और फिलहाल इस योजना को एक बड़ा झटका लगा है. बताया जा रहा है कि दोनों तरफ के नेताओं के बीच बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी थी और वे जिला परिषद चुनाव के नतीजों के ठीक बाद एक होने की तैयारी में थे.

दिग्गज नेताओं ने की बातचीत की पुष्टि

शरद पवार गुट (NCP-SP) के कद्दावर नेता जयंत पाटिल और शशिकांत शिंदे ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि दोनों गुटों के एकीकरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में थी. मामला सिर्फ विलय तक ही सीमित नहीं था, बल्कि अनौपचारिक रूप से यह भी तय किया जा रहा था कि नई व्यवस्था में मंत्रिमंडल कैसा होगा और किन नए चेहरों को जिम्मेदारी दी जाएगी.

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बारामती में हुई गुप्त बैठक

बीते बुधवार की रात जब एनसीपी के बड़े नेता अजित पवार को श्रद्धांजलि देने बारामती पहुंचे, तो वहां माहौल सिर्फ गमगीन नहीं था. सूत्रों की मानें तो वहां वरिष्ठ नेताओं ने एक गुप्त बैठक की, जिसमें राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों पर लंबी चर्चा हुई. यह विलय सिर्फ दो गुटों का मिलन नहीं, बल्कि शरद पवार वाली एनसीपी के सरकार में शामिल होने की तरफ एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

फिलहाल स्थिति यह है कि अजित पवार का गुट सत्ताधारी महायुति गठबंधन का हिस्सा है, वहीं शरद पवार का गुट शिवसेना (UBT) और कांग्रेस के साथ महा विकास अघाड़ी (MVA) में शामिल है. अब देखना यह होगा कि अजित पवार के जाने के बाद क्या शरद पवार अपने कुनबे को फिर से समेटने में कामयाब होते हैं या महाराष्ट्र की राजनीति कोई नया मोड़ लेती है.

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-भारत एक्सप्रेस



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