इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक महिला के नाम से बिना उसकी जानकारी के सुरक्षा याचिका दाखिल कर दी गई. याचिका में महिला और एक पुरुष को विवाहित बताया गया और दोनों की जान को उनके परिजनों से खतरा बताया गया था. इस फर्जी याचिका को लेकर अदालत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे न्यायपालिका के साथ गंभीर धोखाधड़ी करार दिया है.
न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने इस मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि वह मामले की गहराई से जांच कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) को रिपोर्ट सौंपें. उन्होंने कहा कि ऐसा न्यायालय की कार्यवाही में पारंगत किसी व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी बिना संभव नहीं है.
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, “इस मामले में निष्पक्ष और गहन जांच की आवश्यकता है. यदि षड्यंत्रकारी अपने मंसूबे में सफल हो जाते हैं तो यह न केवल न्याय का उपहास होगा बल्कि कानून के शासन में जनता के विश्वास को भी गंभीर रूप से कमजोर करेगा. इसलिए इसे अत्यंत सतर्कता और दृढ़ संकल्प के साथ रोका जाना चाहिए.”
महिला ने कोर्ट में आकर किया बड़ा खुलासा
अप्रैल 2024 में महिला अपने भाई के साथ कोर्ट में पेश हुई और कहा कि उसने न तो कोई सुरक्षा याचिका दाखिल की है और न ही उसमें दिए गए हलफनामे पर कभी हस्ताक्षर किए हैं. यहां तक कि उसका आधार कार्ड भी गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया. हालांकि उसने यह भी कहा कि वह दूसरे याची की विवाहिता नहीं है जैसा याचिका में दावा किया गया है. वह किसी दूसरे व्यक्ति से विवाहित है और उसके दो बच्चे हैं. वर्तमान में अपने पति के साथ वैवाहिक विवाद के कारण अपने पिता के साथ रह रही है. दूसरे याची ने भी संरक्षण याचिका के बारे में कोई जानकारी होने से इनकार किया. दूसरी ओर, याचिका में दर्ज पुरुष याची ने भी किसी याचिका की जानकारी होने से इनकार किया.
अधिवक्ता और शपथ आयुक्त भी घेरे में
जब अदालत ने याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता लल्लन चौबे से जवाब मांगा तो उन्होंने भी कहा कि उन्होंने कोई याचिका दाखिल नहीं की और उनके नाम व हस्ताक्षर का गलत इस्तेमाल किया गया है. वहीं, शपथ आयुक्त की ओर से भी इस मामले में लापरवाही सामने आई. महिला के पति ने जवाबी हलफनामे में दावा किया कि उसकी पत्नी का दूसरे याची के साथ अवैध संबंध है और उसने ससुराल लौटने से मना कर दिया है.
पूरे मामले को संज्ञान में लेते हुए हाईकोर्ट ने सुरक्षा याचिका को खारिज कर दिया और मामले की फोरेंसिक और वैज्ञानिक तरीकों से जांच कर सभी षड्यंत्रकारियों को न्याय के कटघरे में लाने के निर्देश दिए हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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