प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने केंद्र और राज्य सरकार से हाईकोर्ट मे जजों के खाली पदों को भरे न जाने पर जानकारी मांगी है. न्यायमूर्ति वीके बिड़ला तथा न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की खंडपीठ ने कहा कि पिछले छह महीनों में कई बार सूचीबद्ध होने के बावजूद इस मामले में केंद्र सरकार द्वारा कोई स्पष्ट निर्देश या जवाब दाखिल नहीं किया गया.
कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब (Allahabad High Court)
याची के वरिष्ठ अधिवक्ता एसएफए नक़वी और अधिवक्ता शाश्वत आनंद ने कहा कि यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही है, बल्कि संवैधानिक जिम्मेदारी की खुली अवहेलना भी है. इस पर कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार और हाईकोर्ट के अधिवक्ता को एक सितंबर को अगली सुनवाई से पहले आवश्यक निर्देश प्राप्त कर उसे प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है.
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160 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 80 न्यायाधीश कार्यरत हैं- कोर्ट
हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश त्रिवेदी की दाखिल जनहित याचिका में कहा गया है कि न्यायाधीशों के स्वीकृत 160 पद वाले इलाहाबाद हाईकोर्ट में वर्तमान में मुख्य न्यायाधीश सहित मात्र 80 न्यायाधीश कार्यरत हैं जबकि यहां साढ़े 11 लाख से अधिक मामले लंबित हैं.
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याचिका में उठाया गया सवाल (Allahabad High Court)
इस स्थिति को देखते हुए याचिका में सवाल उठाया गया है कि आधे पद खाली होने पर न्याय कैसे मिलेगा. याचिका में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या में वृद्धि की भी मांग की गई है. कहा गया है कि केवल रिक्तियों को भरना पर्याप्त नहीं, बल्कि राज्य की जनसंख्या और न्यायिक बोझ के अनुपात में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या में तत्काल और संरचनात्मक वृद्धि की आवश्यकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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