केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है. गुरुवार को उन्होंने कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के ‘वंदे मातरम’ को केवल दो पदों तक सीमित रखने के फैसले की कड़ी आलोचना की. शाह ने कहा कि कांग्रेस का यह कदम उस ऐतिहासिक गलती की याद दिलाता है, जिसका दूरगामी असर देश को झेलना पड़ा था.
अमित शाह के मुताबिक, 1937 में कांग्रेस ने मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति के चलते ‘वंदे मातरम’ को दो हिस्सों में बांटने का फैसला किया था. उनका दावा है कि इसी तरह के राजनीतिक फैसलों ने आगे चलकर देश में अलगाव की सोच को मजबूत किया और अंततः विभाजन की स्थिति बनी. उन्होंने कहा कि इसी दौर में दो राष्ट्र सिद्धांत को भी बल मिला, जिसके बाद पाकिस्तान का निर्माण हुआ.
‘ऐतिहासिक गलती दोहराई जा रही है’
भाजपा की ओर से जारी बयान में अमित शाह ने कांग्रेस कार्यसमिति के मौजूदा फैसले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने इसे राष्ट्र-विरोधी बताया और कहा कि यह संसद से बने कानून का भी खुला उल्लंघन है. शाह का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजादी के 80 साल बाद 1937 में कांग्रेस द्वारा लिए गए फैसले को सुधारने की कोशिश की है.
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि देश की जनता अब इस सुधार के खिलाफ किसी तरह का विरोध स्वीकार नहीं करेगी. उन्होंने साफ किया कि भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस के फैसले का राजनीतिक तौर पर विरोध करेगी और इस मुद्दे को जनता के बीच तथा संसद समेत विभिन्न सदनों में भी उठाएगी.
राहुल गांधी के नेतृत्व पर भी सवाल
अमित शाह ने कांग्रेस की मौजूदा राजनीति को लेकर राहुल गांधी पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति का यह निर्णय पार्टी की कथित तुष्टीकरण की नीति को ही आगे बढ़ाता है. शाह ने सवाल उठाया कि कांग्रेस एक बार फिर ऐसी राजनीति को क्यों बढ़ावा दे रही है, जिसे भाजपा देशहित के खिलाफ मानती है.
उन्होंने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम’ से जुड़े पुराने विवाद को याद रखना जरूरी है. शाह ने कहा कि देश पहले ही एक बार इस तरह की गलती के परिणाम भुगत चुका है और अब लोगों को एकजुट होकर कांग्रेस के फैसले का विरोध करना चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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