आज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपना 46वां स्थापना दिवस मना रही है. 6 अप्रैल 1980 को मुंबई के लोटस कोलोनी से शुरू हुआ यह सफर आज दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनने तक पहुंच चुका है. इस खास मौके पर देश के गृह मंत्री और भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह ने पार्टी के करोड़ों कार्यकर्ताओं को बधाई दी है. शाह ने न केवल उन संघर्षों को याद किया जिन्होंने पार्टी को इस मुकाम तक पहुंचाया, बल्कि यह भी साफ किया कि भाजपा के लिए ‘सत्ता’ साध्य नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा का एक ‘साधन’ है.
भाजपा ने सभी संकल्पों को चरितार्थ किया: अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर भाजपा की विचारधारा और उसके विजन को स्पष्ट करते हुए लिखा, “चाहे देश की सीमाओं को सुरक्षित करना हो, आंतरिक सुरक्षा को मजबूत बनाना हो, विकास के नए मानदंड स्थापित करना हो या भारतीय संस्कृति की ऐतिहासिकता और प्राण तत्व को पुन: जागृत करना हो- भाजपा ने अपने इन सभी संकल्पों को चरितार्थ करके दिखाया है.”
चाहे देश की सीमाओं को सुरक्षित करना हो, आंतरिक सुरक्षा को मजबूत बनाना हो, विकास के नए मानदंड स्थापित करना हो या भारतीय संस्कृति की ऐतिहासिकता और प्राण तत्व को पुन: जागृत करना हो – भाजपा ने अपने इन सभी संकल्पों को चरितार्थ करके दिखाया है।
भाजपा का मूल मंत्र हमेशा स्पष्ट रहा है –…
— Amit Shah (@AmitShah) April 6, 2026
अमित शाह ने आगे लिखा कि भाजपा का मूल मंत्र हमेशा स्पष्ट रहा है- ‘Nation First, Party Next, Self Last’. इसी मूल भावना के साथ भाजपा का हर कार्यकर्ता दिन-रात राष्ट्र-सेवा में समर्पित है. भाजपा के स्थापना दिवस के अवसर पर मैं उन सभी महानुभावों को नमन करता हूं, जिन्होंने ऋषि दधीचि के समान राष्ट्रहित सर्वोपरि के महान यज्ञ में अपना सर्वस्व अर्पण कर भाजपा को एक विराट वटवृक्ष बनाने में अहम योगदान दिया है.
#47YearsOfNationFirst
दधीचि के त्याग से वटवृक्ष तक का सफर
अमित शाह ने अपने पोस्ट में ‘ऋषि दधीचि’ का उदाहरण देकर उन पुराने कार्यकर्ताओं और नेताओं को याद किया है, जिन्होंने तब पार्टी का झंडा थामा था जब संसद में भाजपा की केवल 2 सीटें हुआ करती थीं. शाह का मानना है कि आज जो ‘विराट वटवृक्ष’ हम देख रहे हैं, वह उन लाखों कार्यकर्ताओं के खून-पसीने और बलिदान की नींव पर खड़ा है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्रहित के ‘महायज्ञ’ में होम कर दिया.
सुरक्षा, विकास और सांस्कृतिक पुनरुत्थान
गृह मंत्री ने तीन मुख्य बिंदुओं पर जोर दिया है जो भाजपा की पहचान बन चुके हैं:
सीमा और आंतरिक सुरक्षा: अनुच्छेद 370 का खात्मा और आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति.
विकास के नए मानदंड: डिजिटल इंडिया से लेकर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह.
सांस्कृतिक ऐतिहासिकता: अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण और काशी-विश्वनाथ धाम जैसे प्रोजेक्ट्स के जरिए भारतीय संस्कृति के ‘प्राण तत्व’ को पुनर्जीवित करना.
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-भारत एक्सप्रेस
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