Wakf Bill Debate: लोकसभा में बुधवार को केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू (Keiren Rijiju) ने वक्फ संशोधन बिल पेश किया, जिसके बाद विपक्षी सांसदों ने हंगामा किया. इस दौरान कांग्रेस ने इस बिल पर आपत्ति जताई और इसे लेकर विरोध किया.
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने वक्फ संशोधन बिल पेश किए जाने पर विरोध जताते हुए कहा कि इस प्रकार का बिल लाते वक्त कम से कम सदस्यों को संशोधन करने का अधिकार होना चाहिए. वेणुगोपाल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आप कानून को जबरन थोप रहे हैं और सदन में संशोधन के लिए पर्याप्त वक्त दिया जाना चाहिए था.
#WATCH | Waqf (Amendment) Bill taken up for consideration and passing in Lok Sabha
Union Home Minister Amit Shah says, “…It was your (opposition) insistence that a Joint Parliamentary Committee should be formed. We do not have a committee like the Congress. We have a… pic.twitter.com/bbKRTuheft
— ANI (@ANI) April 2, 2025
अमित शाह का जवाब: हमारी समिति लोकतांत्रिक है
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस सांसद के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि यह आपकी (विपक्ष की) मांग थी कि एक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) बनाई जाए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस जैसी समिति हमारी नहीं है, बल्कि हमारी समिति लोकतांत्रिक है, जो मंथन करती है और विचार-विमर्श के आधार पर परिवर्तन करती है.
अमित शाह ने यह भी कहा कि कांग्रेस के जमाने में समिति केवल ठप्पा लगाती थी, जबकि उनकी समिति चर्चा करती है और बदलाव करती है. उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वक्फ संशोधन बिल को कैबिनेट द्वारा पहले मंजूरी दी गई थी, इसके बाद समिति ने इसे मंथन किया और सुझाव दिए, जिन्हें कैबिनेट ने स्वीकार किया.
समिति का क्या मतलब अगर बदलाव स्वीकार न किए जाएं?
अमित शाह ने यह सवाल भी उठाया कि अगर बदलाव स्वीकार नहीं किए जाते, तो फिर समिति का क्या मतलब रह जाता है? उन्होंने कहा कि कांग्रेस की तरह की समिति केवल दिखावे के लिए होती थी, जो ठप्पा लगाती थी, जबकि उनकी समिति वास्तव में बदलाव लाती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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