1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की सबसे बुलंद आवाज और नारी शक्ति की मिसाल, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर आज पूरा देश उन्हें नमन कर रहा है. इस ऐतिहासिक मौके पर देश के गृह मंत्री अमित शाह ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट साझा कर वीरांगना लक्ष्मीबाई को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की.
समर्पण और स्वाभिमान की साक्षात प्रतिमूर्ति
गृह मंत्री ने रानी लक्ष्मीबाई के अदम्य साहस को याद करते हुए उन्हें ‘मातृभूमि के प्रति सर्वस्व समर्पण और स्वाभिमान की साक्षात प्रतिमूर्ति’ बताया.
मातृभूमि के प्रति सर्वस्व समर्पण और स्वाभिमान की प्रतिमूर्ति रानी लक्ष्मीबाई जी ने अपने अदम्य साहस और असाधारण रणकौशल से अंग्रेजी सत्ता की नींव हिला दी थी। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में उनके शौर्यपूर्ण नेतृत्व ने समूचे स्वाधीनता आंदोलन को नई ऊर्जा और दिशा दी। उनकी वीरगाथा सदैव… pic.twitter.com/nVdN4Tj4DR
— Amit Shah (@AmitShah) June 18, 2026
अमित शाह ने लिखा कि रानी साहब ने जिस असाधारण रणकौशल और बहादुरी से अंग्रेजों के खिलाफ तलवार उठाई थी, उसने ब्रिटिश हुकूमत की जड़ों को हिलाकर रख दिया था. 1857 की क्रांति में उनके नेतृत्व ने देश के स्वाधीनता आंदोलन को एक नई ऊर्जा और सही दिशा देने का काम किया, जो आज भी हर भारतीय के रगों में देशभक्ति का जज्बा पैदा करता है.
ग्वालियर के पास वीरगति को हुई
इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि रानी लक्ष्मीबाई ने जीते जी कभी हार नहीं मानी. ब्रिटिश साम्राज्यवाद की दमनकारी नीतियों के खिलाफ उन्होंने अपनी छोटी सी सेना के साथ लोहा लिया था. झांसी की रक्षा करते-करते आखिरकार 18 जून 1858 को ग्वालियर के पास कोटा-की-सेराई में वह मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं.
रानी लक्ष्मीबाई की ये अमर वीरगाथा आने वाली कई पीढ़ियों को देशप्रेम, साहस और स्वाधीनता की सीख देती रहेगी. गौरतलब है कि भारत सरकार वीरांगना लक्ष्मीबाई की स्मृतियों और उनकी विरासत को सहेजने के लिए लगातार कई तरह के शैक्षणिक कार्यक्रमों, स्मारकों और विशेष पहलों के जरिए काम कर रही है, ताकि युवाओं को इतिहास के इस स्वर्णिम अध्याय से हमेशा जोड़े रखा जा सके.
-भारत एक्सप्रेस
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