गैंगस्टर से राजनेता बने और हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे अरुण गवली को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने अरुण गवली की ओर से दायर जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. जस्टिस सुधांशू धुलिया और जस्टिस के विनोद चंद्रन कि पीठ बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया है.
महाराष्ट्र सरकार के वकील ने गवली की ओर से दायर जमानत का विरोध करते हुए कहा था कि गवली के खिलाफ 46 मुकदमा दर्ज है. जिनमें 10 मुकदमा हत्या से जुड़ा हुआ है.
अरुण गवली की रिहाई नीति में बदलाव
महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया था कि अरुण गवली 17 सालों से जेल में बंद है और नई रिहाई नीति के तहत 40 साल से कम की सजा काटने से पहले रिहाई नही की जा सकती. जिसपर गवली की ओर पेश वकील ने कहा था कि राज्य सरकार ने साल 2015 में अपनी रिहाई नीति में बदलाव किया है, लेकिन जब अरुण गवली को साल 2009 में सजा सुनाई गई थी, तब तक नई नीति लागू नही हुई थी.
ऐसे में पुरानी नीति के तहत उम्र और बीमारियों के आधार पर गवली को रिहाई मिलनी चाहिए. बतादें कि बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर की बेंच ने 5 अप्रैल को अपने फैसले में अरुण गवली को राहत देते हुए राज्य सरकार से गवली की समय से पूर्व रिहाई पर विचार करने को कहा था.
दरअसल हत्या के एक मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे गवली को हाई कोर्ट ने राज्य के अधिकारियों को 2006 की छूट नीति के तहत समयपूर्व रिहाई के लिए गवली की अर्जी पर विचार करने का निर्देश दिया था.
-भारत एक्सप्रेस
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