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काउंटिंग सेंटर के अंदर कैसे गिने जाते हैं वोट? जानें ईवीएम की सील से लेकर सर्टिफिकेट मिलने तक की पूरी प्रक्रिया

आज 4 मई को पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और अन्य राज्यों के चुनावी नतीजे आ रहे हैं. रुझानों के शोर के बीच क्या आप जानते हैं कि ईवीएम में दर्ज आंकड़े आधिकारिक नतीजे कैसे बनते हैं? सुरक्षा के कड़े पहरे से लेकर रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा सर्टिफिकेट जारी किए जाने तक का पूरा सफर यहाँ पढ़ें.

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Assembly Election Results 2026: आज 4 मई को पूरे देश की नजरें 5 राज्यों पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी के चुनाव नतीजों पर टिकी हुई है. सुबर से ही टीवी और फोन की स्क्रीनों पर रुझानों का खेल जारी है. कहीं लड्डू बंटने की तैयारी हो रही है तो कहीं पटाखों का स्टॉक तैयार रखा है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इतनी सारी सीटों पर डलने वाले वोटों की गिनती आखिर होती कैसे हैं? स्ट्रॉन्ग रूम से मशीन निकलने और फिर किसी उम्मीदवार के गले में जीत का हार डलने तक की पूरी प्रक्रिया आखिर होती कैसे है?

अक्सर हम खबरों में रुझान और नतीजे सुनते हैं, लेकिन इसके पीछे चुनाव आयोग की एक बेहद सख्त और पारदर्शी मशीनरी काम करती है. आइए, इसे बहुत ही आसान भाषा में समझते हैं.

सुरक्षा का कड़ा पहरा

मतदान खत्म होने के तुरंत बाद से ही ईवीएम और वीवीपैट मशीनें स्ट्रॉन्ग रूम में कैद होती हैं. अब आपके मन में सवाल आएगी कि आखिर ये स्ट्रॉन्ग रूम होती क्या है? आपको बता दें कि ये एक ऐसा रूम होता है जहां सुरक्षा का ऐसा घेरा होता है जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता. यहां सेंट्रल फोर्स के जवान तैनात होते है और राजनीतिक दलों के एजेंट भी बाहर डेरा डाले रहते हैं. मतगणना वाले दिन सबकी मौजूदगी में इन कमरों की सील चेक की जाती है और फिर उन्हें खोला जाता है. मतगणना वाले दिन सबकी मौजूदगी नें इन कमरों की सील चेक की जाती है और फिर इन्हें खोला जाता है. इस बीच अगर किसी को कोई शक होता है तो वो तुरंत आपर्ती दर्ज करा सकता है.

सुबह 8 बजे की पहली घंटी

गिनती सुबह करीब 8 बजे से शुरू हो जाती है. नियाम कहता है कि सबसे पहले पोस्टल बैलेट की गिनती होगी. इसमें सेना के जवान, सरकारी कर्मचारी और चुनावी ड्यूटी में लगे लोगों के वोट होते हैं. शुरुआती आधे घंटे के रुझान अक्सर इन्हीं वोटों के आधार पर होते हैं. इसके बाद शुरू होता है ईवीएम का असली मुकाबला.

काउंटिंग सेंटर का नजारा

मतगणना केंद्र के अंदर हर टेबल पर एक काउंटिंग सुपरवाइजर, सहायक एख माइक्रो ऑब्जर्वर तौनात होता है. यहां कोई भी बिना आई-कार्ड के नहीं घुस सकता. खास बात ये है कि हर उम्मीदवार का एक एजेंट हर टेबल पर मौजूद रहता है, जो इस चीज पर ध्यान देता है कि मशीन परबटन दबाते ही किस उम्मीदवार को कितने वोट मिले हैं. हर राउंड के बाद वोटों को जोड़ा जाता है और फिर उसकी आधिकारिक घोषणा की जाती है.

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क्या होता है वीवीपैट का मिलान?

पारदर्शिता बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग हर विधानसभा क्षेत्र की किन्हीं पांच वीवीपैट मशीनों की पर्चियों का मिलान ईवीएम के आंकड़ों से करता है. यह प्रक्रिया सबसे अंत में होती है. अगर ईवीएम के आंकड़े और वीवीपैट की पर्चियां बिल्कुल बराबर हैं, तभी नतीजे को पुख्ता माना जाता है.

जब मुकाबला ‘टाई’ हो जाए या दोबारा गिनती की मांग उठे

लोकतंत्र में कभी-कभी ऐसी स्थिति भी आती है जब दो उम्मीदवारों को बराबर वोट मिल जाते हैं. ऐसे में चुनाव आयोग लॉटरी या ड्रॉ का सहारा लेता है. वहीं अगर कोई उम्मीदवार बहुत कम वोटों के अंतर से हारता है, तो वह री-काउंटिंग की मांग कर सकता है. हालांकि यह पूरी तरह रिटर्निंग ऑफिसर पर निर्भर करता है कि वह मांग को जायज मानता है या नहीं.

जब सभी राउंड की गिनती पूरी हो जाती है और वीवीपैट का मिलान भी सफल रहता है, तब रिटर्निंग ऑफिसर अंतिम नतीजे का ऐलान करता है. विजेता उम्मीदवार को उसी वक्त जीत का सर्टिफिकेट दिया जाता है. इसके बाद ही वह विजयी प्रत्याशी कहलाता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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