Bagaha Hospital Guard Stitching Incident: बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली की एक रोंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीर पश्चिम चंपारण के बगहा अनुमंडलीय अस्पताल से सामने आई है. यहां अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ और स्टाफ की कमी के चलते एक सुरक्षा गार्ड को ‘डॉक्टर’ की भूमिका निभानी पड़ी. सड़क हादसे में घायल एक युवक के घावों पर सुरक्षा गार्ड द्वारा टांके लगाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसने सरकारी दावों की पोल खोल कर रख दी है.
हादसे के बाद अस्पताल में मची चीख-पुकार
जानकारी के मुताबिक, नेशनल हाईवे-727 पर एक टेंपो और पिकअप वैन की भीषण टक्कर हो गई थी. इस हादसे में घायल वसीम अख्तर और सुरेंद्र पासी को गंभीर हालत में बगहा अनुमंडलीय अस्पताल लाया गया. उसी दौरान कुछ और सड़क हादसों के मरीज भी अस्पताल पहुँच गए, जिससे इमरजेंसी वार्ड में अफरा-तफरी मच गई. हर तरफ से ‘डॉक्टर-डॉक्टर’ की आवाजें गूँज रही थीं, लेकिन अस्पताल में न तो पर्याप्त डॉक्टर थे और न ही ड्रेसर.
मजबूरी में थमाया गार्ड को ‘सर्जिकल धागा’
अस्पताल में स्थिति इतनी बेकाबू हो गई कि वहां मौजूद डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के लिए सुरक्षा गार्ड की मदद लेने का फैसला किया. वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि जिस हाथ में बंदूक या डंडा होना चाहिए था, वह गार्ड बड़ी सफाई से मरीज के घावों को सिल रहा है. आमतौर पर यह काम किसी प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ या ड्रेसर का होता है, लेकिन स्टाफ की अनुपलब्धता ने अस्पताल को यह ‘जोखिम’ लेने पर मजबूर कर दिया.
मामले पर डॉक्टर की अजीब दलील क्या?
इस गंभीर मामले पर जब अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. अशोक कुमार तिवारी से सवाल किया गया, तो उन्होंने अपनी बेबसी जाहिर की. उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि अस्पताल में लंबे समय से ड्रेसर और नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी है. एक साथ 5-6 गंभीर मरीज आने पर उन्हें संभालना मुश्किल हो गया था. मरीजों की जान बचाने के लिए मजबूरी में सुरक्षा गार्ड का सहयोग लिया गया. डॉक्टर का यह बयान स्वास्थ्य विभाग की पूरी व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान है.
भगवान भरोसे है स्वास्थ्य व्यवस्था?
इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि बिहार के उप-मंडलीय स्तर के अस्पतालों की बुनियादी ढांचा कितना खोखला है. अगर किसी गार्ड की छोटी सी चूक से इन्फेक्शन या कोई बड़ा हादसा हो जाता, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता?स्थानीय लोग अब सरकार से सवाल पूछ रहे हैं कि करोड़ों के बजट के बावजूद अस्पतालों में ड्रेसर और नर्सों की भर्ती क्यों नहीं की जा रही है. फिलहाल, यह वीडियो सोशल मीडिया पर प्रशासन के खिलाफ गुस्से का केंद्र बना हुआ है.
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-भारत एक्सप्रेस
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