Bharat Express DD Free Dish

बाड़मेर करेगा भारत को मालामाल! मिला नियोबियम का विशाल भंडार, जानें कहां होता है इस्तेमाल

Niobium Reserve Found In Barmer: भारतीय भूवैज्ञानिकों को सिवाना के चट्टानों में नियोबियम का विशाल भंडार मिला है. शुरुआती रिपोर्ट में बताया गया है कि सिवाना की पहाड़ियों में मिले इस रेयर अर्थ मिनिरल का घनत्व दुनिया के औसत घनत्व से बहुत ज्यादा है.

Niobium Reserve Found In Barmer

Niobium Reserve Found In Barmer: अपने विशाल थार डेजर्ट के लिए मशहूर राजस्थान का बाड़मेर जिला अब दुनिया का “एनर्जी कैपिटल” बनने जा रहा है. बाड़मेर की धरती के गर्भ में वो खजाना मिला है जिसकी तलाश भारत को बहुत समय से थी. यहां नियोबियम जैसे रेयर अर्थ मिनिरल की खोज हुई है. जिसका घनत्व दुनिया के औसत से 100 गुना ज्यादा बताया जा रहा है. इस रेयर अर्थ मिनिरल का उपयोग रॉकेट, फोन, डिफेंस, इलेक्ट्रिक कार और अन्य बहुत सी आधुनिक चीजों में होता है.

भारतीय भूवैज्ञानिकों को सिवाना के चट्टानों में नियोबियम का विशाल भंडार मिला है. शुरुआती रिपोर्ट में बताया गया है कि सिवाना की पहाड़ियों में मिले इस रेयर अर्थ मिनिरल का घनत्व दुनिया के औसत घनत्व से बहुत ज्यादा है. जिसके बाद वैज्ञानिक इसे भारत का भविष्य भी बता रहे हैं. क्योंकि अबतक इसके उत्पादन में चीन दुनिया का 80 प्रतिशत से अधिक स्टेक रखता है. बाड़मेर में मिले इस खजाने के दम पर भारत अब चीन का यह घमंड तोड़ सकता है.

एक मीडिया चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक सिवाना के भाटीखेड़ा में सरकार ने एक ब्लॉक का ऑक्शन भी शुरू कर दिया है. बाड़मेर के भूवैज्ञानिक सी.पी. दाधीच ने बताया है कि सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स के ब्लॉक का ऑक्शन हो रहा है.

इन जगहों पर मौजूद हैं रेयर अर्थ

रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि सिवाना के लंगेरा, राखी, दांता, कमठाई, फूलन, भाटीखेड़ा और डण्डाली में इस रेयर अर्थ के विशाल भंडार मौजूद है. इसके चारों तरफ मौजूद गढ्ढेनुमा संरचना में ग्रेनाइट और रॉयलाइट व एल्केलाइन की अग्नेय चट्टानें पाई गई हैं. जिन्हें सिवाना रिंग्स कॉम्पलेक्स और मालानी रॉक्स के नाम से जाना जाता है.

ये भी पढ़ें- “आपकी सेवा भावना हम सबके लिए प्रेरणा”… संसद शीतकालीन सत्र के पहले दिन PM मोदी ने राज्यसभा सभापति को दी शुभकामनाएं

सिवाना रिंग्स कॉम्प्लेक्स में मौजूद हैं ये भंडार

बाड़मेर के सिवाना रिंग्स कॉम्प्लेक्स में कई खनिज भंडार पहले से ही मौजूद हैं. जिनमें गैलेनियम, रूबीडियम, थोरियम, इप्रीयम, यूरेनियम, टिलूरियम, सीरियम सहित 15 प्रकार के खनिज शामिल हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक ये सभी खनिज लेंथोनोइट ग्रुप के हैं. जिनका उपयोग सुपर कंडक्टर, मैग्नेट, हाई प्लग्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑयल रिफाइनरी और हाईब्रिड कारों के पार्ट्स बनाने में होता है. इनका उपयोग चिकित्सा क्षेत्र में भी होता है. कैंसर जैसी घातक बिमारी में उपयोग की जाने वाली कीमोथेरेपी में भी इन्हीं मिनिरल्स का उपयोग किया जाता है.

भूवैज्ञानिकों के मुताबिक सिवाना की पहाड़ियों में 900 अरब रुपये से अधिक के खनिज पदार्थ मौजूद हैं. जिनसे करीब 6 हजार मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान है.

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read