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आजादी के 80 साल बाद भी ‘ट्यूब’ के भरोसे स्कूल! वेतन कटौती के खौफ से मौत को मात देकर नदी पार कर रहे शिक्षक

MP News: भिंड के बबेड़ी क्षेत्र में ई-अटेंडेंस लगाने की मजबूरी के कारण शिक्षक अपनी जान जोखिम में डालकर ट्यूब के सहारे उफनती बैसली नदी पार कर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं.

A government teacher and children crossing the swollen Baisli River in Bhind while sitting on an inner tube.

भिंड में उफनती बैसली नदी को ट्यूब पर बैठकर पार करते सरकारी शिक्षक और बच्चे. (PC- Bharat Express)

MP News:दीपक शर्मा/भिंड:  मध्यप्रदेश के भिंड जिले में ई-अटेंडेंस का डर और वेतन कटने की कार्रवाई का खौफ शिक्षकों को जान जोखिम में डालने पर मजबूर कर रहा है. उफनती बैसली नदी को ट्यूब पर सवार होकर पार करते इन शिक्षकों की तस्वीरें सरकारी व्यवस्था पर बड़े सवाल उठा रही हैं.

भिंड जिले की ग्राम पंचायत बबेड़ी के शासकीय विद्यालयों में बारिश के दिनों में रास्ते बंद हो जाते हैं. बैसली नदी में उफान के कारण नदरौली, सुमेर सिंह का पुरा और पराए का पुरा का संपर्क कट जाता है. इसके बावजूद, लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के ई-अटेंडेंस नियम और वेतन कटौती की कार्रवाई के डर से शिक्षकों को ग्रामीणों की मदद से हवा भरे ट्यूब पर बैठकर उफनती नदी पार करनी पड़ रही है.

क्या है मामला?

मध्यप्रदेश के भिंड जिले से शिक्षा विभाग के दावों की धज्जियां उड़ाती एक गंभीर तस्वीर सामने आई है. ग्राम पंचायत बबेड़ी स्थित शासकीय प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों तक पहुंचने के लिए शिक्षकों और छात्र-छात्राओं को बरसात के दिनों में अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है. सड़क और पुल की सुविधा न होने के कारण शिक्षक हवा भरे ट्यूब पर सवार होकर उफनती बैसली नदी पार करने को विवश हैं.

पानी का स्तर बढ़ने से जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता

बारिश के मौसम में बैसली नदी और उससे जुड़े नालों में पानी का स्तर बढ़ जाने से नदरौली, सुमेर सिंह का पुरा और पराए का पुरा गांव का संपर्क कट जाता है. इससे स्थानीय ग्रामीणों का जीवन करीब चार महीनों के लिए अस्त-व्यस्त हो जाता है. नदी पार न कर पाने के कारण छात्र-छात्राएं तो स्कूल नहीं पहुंच पाते, लेकिन लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के ई-अटेंडेंस नियम के चलते शिक्षकों का स्कूल पहुंचना हर हाल में अनिवार्य होता है.

शिक्षक जान जखिम में डालकर नदी पार करते

शिक्षकों का कहना है कि यदि समय पर ऑनलाइन हाजिरी दर्ज नहीं हुई, तो उच्च अधिकारियों द्वारा वेतन काटने की कार्रवाई की बात कही जाती है. इसी प्रशासनिक दबाव के चलते शिक्षक अपनी जान को खतरे में डालकर रोजाना उफनती नदी को पार करते हैं. इसके लिए उन्हें घंटों नदी किनारे बैठकर ग्रामीणों का इंतजार करना पड़ता है, जो ट्यूब की मदद से उन्हें सुरक्षित दूसरे छोर पर पहुंचाते और वापस लाते हैं.

सरकारी तंत्र और विभाग के कड़े नियमों के बीच पिस रहे

देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाए जाने के बावजूद आज भी इन गांवों तक सड़क, सुरक्षित पानी और पुल जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं. नदरौली प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालय, सुमेर सिंह का पुरा माध्यमिक विद्यालय और पराए का पुरा के बच्चे तथा शिक्षक रोजाना बुनियादी सुविधाओं के अभाव में सरकारी तंत्र और विभाग के कड़े नियमों के बीच पिस रहे हैं.

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-भारत एक्सप्रेस 



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