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RJD का ‘सोनू’ पड़ा भारी! भोजपुर-बक्सर में कन्हैया की हार ने बढ़ाई JDU की टेंशन, क्या नेतृत्व परिवर्तन पड़ा भारी?

बिहार के भोजपुर-सह-बक्सर स्थानीय प्राधिकार निर्वाचन क्षेत्र के उपचुनाव का नतीजा सामने आते ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है.

Bhojpur-Buxar Result: बिहार के भोजपुर-सह-बक्सर स्थानीय प्राधिकार निर्वाचन क्षेत्र के उपचुनाव का नतीजा सामने आते ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. इस बेहद रोमांचक मुकाबले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के उम्मीदवार सोनू राय ने जीत हासिल कर ली है. उन्होंने जनता दल यूनाइटेड (JDU) के प्रत्याशी कन्हैया प्रसाद को 340 वोटों के अंतर से हराया है. सोनू राय को कुल 2,486 वोट मिले, जबकि कन्हैया प्रसाद 2,146 वोटों पर सिमट गए.

आरा के राजकीय कन्या +2 उच्च विद्यालय में हुई मतगणना के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे. दो राउंड की गिनती के बाद ही तस्वीर साफ हो गई और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के खेमे में जश्न का माहौल बन गया.

इस उपचुनाव की एक खास बात यह रही कि इसमें मतदान प्रतिशत बेहद ऊंचा रहा. 12 मई 2026 को हुए मतदान में 97.96 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई, जो अपने आप में राजनीतिक भागीदारी का मजबूत संकेत माना जा रहा है. भोजपुर और बक्सर दोनों जिलों में चुनाव को लेकर शुरू से ही जबरदस्त उत्साह देखने को मिला था.

RJD के लिए राहत और नया भरोसा

2025 के विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद राष्ट्रीय जनता दल के लिए यह जीत किसी राहत से कम नहीं मानी जा रही है. उस समय पार्टी को सिर्फ 25 सीटें मिली थीं और पूरा महागठबंधन 35 सीटों पर ही सिमट गया था. ऐसे में यह उपचुनाव परिणाम आरजेडी कार्यकर्ताओं और नेतृत्व के लिए मनोबल बढ़ाने वाला साबित हुआ है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंचायत स्तर के प्रतिनिधियों के बीच आरजेडी की पकड़ अब भी मजबूत बनी हुई है, जो पार्टी के लिए आगे की रणनीति में मददगार हो सकती है.

JDU के लिए बढ़ी चिंता

इस हार को जेडीयू के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से हटने और नए नेतृत्व के आने के बाद यह पहला बड़ा चुनावी इम्तिहान था. वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि शीर्ष नेतृत्व में बदलाव के बाद पार्टी का जमीनी प्रभाव कमजोर होता दिख रहा है.

कई विश्लेषक इसे एनडीए के भीतर समन्वय की चुनौती और स्थानीय स्तर पर सत्ता विरोधी लहर से भी जोड़कर देख रहे हैं.

यह उपचुनाव सिर्फ एक सीट का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके कई राजनीतिक संकेत निकाला जा रहा हैं. पहला, नेतृत्व परिवर्तन का असर जमीनी राजनीति पर साफ दिख रहा है. दूसरा, एनडीए के भीतर नई खींचतान की चर्चा तेज हो सकती है. और तीसरा, स्थानीय स्तर पर एंटी-इंकंबेंसी का असर भी दिखाई दिया है.

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भारत एक्सप्रेस



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