दरभंगा की सबसे 'हॉट सीट' पर महाभारत
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव की रणभूमि में लोक गायिका मैथिली ठाकुर ने आधिकारिक तौर भाजपा ने दरभंगा जिले की अलीनगर सीट से उम्मीदवार बना दिया है. हालांकि, यह सीट बीजेपी के लिए इतनी आसान नहीं है. यह सीट हाल ही में मिश्रीलाल यादव की विधायकी रद्द होने के कारण खाली हुई है. यहां, 2020 में NDA को RJD के खिलाफ महज 3101 वोटों के करीबी अंतर से जीत मिली थी. RJD के कद्दावर नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी का पूर्व गढ़ रही इस सीट पर अब यादव और ब्राह्मण मतदाताओं के समीकरण हावी हैं. ऐसे में, मैथिली ठाकुर तीन बड़े फैक्टरों को साधना होगा.
पहले चर्चा थी कि वो बेनीपट्टी या अलीनगर में से किसी एक सीट वह चुनाव लड़ना चाहती हैं. मगर बीजेपी ने बेनीपट्टी सीट पर पहले ही उम्मीदवार घोषित कर दिया था, इसलिए अब अलीनगर से मैथिली ठाकुर (BJP Brahmin Face Maithili Thakur) को टिकट दिया गया है. लेकिन सवाल यह है कि क्या बीजेपी ने जिस सीट से मैथिली ठाकुर को चुनावी मैदान में उतारा है, वहां उनकी राह इतनी आसान है?
तीन मोर्चों पर करनी होगी मेहनत (Task For Maithili Thakur In Bihar Election)
मैथिली ठाकुर के सामने चुनौती सिर्फ विपक्ष नहीं, बल्कि अलीनगर की जमीनी राजनीति भी है. यह सीट जहां पहले आरजेडी के सिद्दीकी और मिश्रा जैसे नेताओं की रही है, वहीं अब बीजेपी चाहती है कि वह इसे अपने मजबूत गढ़ में बदल दे. इसके लिए मैथिली ठाकुर को तीन मोर्चों (पार्टी संगठन, जातीय संतुलन और जनता से जुड़ाव) पर मेहनत करनी होगी. अगर वो ये तीनों समीकरण साध लेती हैं, तो अलीनगर से उनकी जीत की धुन जरूर सुनाई दे सकती है.
पुरानी सीट और नया चेहरा
अलीनगर सीट 2020 में बीजेपी की सहयोगी पार्टी वीआईपी (विकासशील इंसान पार्टी) के टिकट पर मिश्रीलाल यादव जीते थे. हालांकि, बाद में वह बीजेपी में शामिल हो गए. हालांकि, उन्हें कुछ समय पहले ही एक मामले में 2 साल जेल की सजा सुनाई गई है. इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई. अब यहां से बीजेपी को एक नया और साफ चेहरा चाहिए था. इस कारण भाजपा ने मैथिली ठाकुर पर दांव लगाया है. उन्हें यहां अपने चेहरे के दम पर वोट लाने होंगे. क्योंकि, सियासत में तो वह नई-नई हैं.
जातीय गणित साधना होगा
अलीनगर सीट का इतिहास जातीय समीकरणों से गहराई से प्रभावित रहा है. यह इलाका पहले आरजेडी का गढ़ हुआ करता था. हालांकि, 2008 के परिसीमन में चीजें बदल गईं. मीनागाछी सीट का कुछ हिस्सा अलीनगर बन गया. इसके बाद भी आरजेडी नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने यहां से 2010 और 2015 में यहां से विधायक बनकर आए. 2020 में RJD ने रणनीति बदली और ब्राह्मण उम्मीदवार उतारा बदले में NDA ने यादव उम्मीदवार मैदान में लाया और जीत हासिल कर ली. एक एक बार फिर बीजेपी ब्राह्मण उम्मीदवार लेकर आई है. उसे उम्मीद है कि उसे यादव के साथ ब्राह्मण को भी वोट मिलेगा.
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ब्राह्मण बनाम यादव वोट बैंक
अलीनगर में ब्राह्मण और यादव मतदाता लगभग बराबर संख्या में हैं. बीजेपी को पिछली बार यह भरोसा था कि ब्राह्मण वोट उनके साथ रहेगा, लेकिन आरजेडी ने वहां भी पैठ बना ली. अब बीजेपी ने इस बार की गलती सुधारते हुए ब्राह्मण चेहरा मैथिली ठाकुर को उतारा है. पार्टी का मानना है कि मैथिली जाति से ऊपर उठकर लोकप्रिय चेहरा हैं. उनके गीत, सादगी और सोशल मीडिया पर प्रभाव से वो हर वर्ग की महिलाओं और युवाओं तक पहुंच रखती हैं.
हाई-रिस्क, हाई-रिवॉर्ड की रणनीति
बीजेपी का अलीनगर सीट पर मैथिली ठाकुर (Bihar Election Maithili Thakur) को उम्मीदवार बनाने का फैसला एक हाई-रिस्क, हाई-रिवॉर्ड वाली रणनीति है. पार्टी को उम्मीद है कि मैथिली ठाकुर की जाति से परे लोकप्रियता और उनके ब्राह्मण होने से, वह RJD के यादव वोट बैंक में सेंध लगाने के साथ-साथ ब्राह्मण वोट को भी पूरी तरह से अपने पाले में वापस ला पाएंगी. ऐसे में मैथिली ठाकुर को न केवल पारंपरिक समीकरणों को तोड़ना होगा, बल्कि महिलाओं और युवाओं का समर्थन भी बड़े पैमाने पर जुटाना होगा. अब देखना होगा कि वह इसपर कितनी सफल हो पाती है.
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