बिहार विधान परिषद की आठ स्नातक और शिक्षक सीटों पर होने वाला चुनाव इस बार कई मायनों में दिलचस्प बन गया है. मुकाबला सिर्फ एनडीए और महागठबंधन के बीच नहीं रह गया है. कई सीटों पर बागी उम्मीदवार, निर्दलीय प्रत्याशी और जन सुराज के उम्मीदवार भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं. इससे चुनावी समीकरण लगातार बदल रहे हैं और कई जगहों पर मुकाबला सीधा न रहकर बहुकोणीय हो गया है.
सबसे खास बात यह है कि गठबंधनों के भीतर ही कई सीटों पर अलग-अलग उम्मीदवार मैदान में हैं. इसका असर वोटों के बंटवारे पर पड़ सकता है. सत्तारूढ़ एनडीए के लिए भी यह चुनाव अहम माना जा रहा है, क्योंकि यहां उम्मीदवारों की ताकत के साथ-साथ सहयोगी दलों के बीच तालमेल की भी परीक्षा होगी.
पटना और दरभंगा में कई उम्मीदवारों के बीच मुकाबला
पटना स्नातक सीट पर जदयू के नीरज कुमार के सामने राजद के दिलीप कुमार, कांग्रेस के एम. असदुल्लाह और जन सुराज के अनूज सिंह चुनाव मैदान में हैं. इनके अलावा दूसरे उम्मीदवार भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. ऐसे में यहां मुकाबला कई पक्षों के बीच सिमटता नजर नहीं आ रहा है.
दरभंगा स्नातक सीट पर भी राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत लगाने की तैयारी की है. भाजपा के सर्वेश कुमार का सामना राजद के अनिल झा, कांग्रेस के रजनीकांत पाठक और माले के संदीप चौधरी से है. एक ही सीट पर अलग-अलग दलों के उम्मीदवार होने से वोटों का गणित अहम हो गया है.
कोसी स्नातक सीट पर राजद के नितेश कुमार और कांग्रेस के मनोज जायसवाल मैदान में हैं. वहीं, तिरहुत स्नातक सीट पर जदयू के अभिषेक झा और राजद के रश्मि विवेक गौतम के बीच मुकाबले के साथ वंशीधर व्रजवासी की मौजूदगी ने भी चुनाव को चर्चा में ला दिया है.
शिक्षक सीटों पर भी आसान नहीं है राह
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में भी तस्वीर कुछ ऐसी ही है. पटना शिक्षक सीट पर भाजपा के नवल किशोर यादव, राजद के संजीव कुमार और कांग्रेस के संजय कुमार के बीच मुकाबला है. तीनों उम्मीदवारों के मैदान में होने से यहां भी चुनावी गणित पर नजर रहेगी.
सारण शिक्षक सीट पर जन सुराज के अफाक अहमद, जदयू के आनंद पुष्कर, राजद के जयराम यादव और निर्दलीय रामपुकार सिन्हा अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं. इस सीट पर अलग-अलग दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी मुकाबले को और व्यापक बना रही है.
दरभंगा शिक्षक सीट पर महागठबंधन के भीतर उम्मीदवारों को लेकर अलग-अलग दावेदारियां दिखाई दे रही हैं. कांग्रेस के निवर्तमान एमएलसी मदन मोहन झा के सामने राजद के कुमार राउत और सीपीएम के रामदेव राय चुनाव लड़ रहे हैं. इससे विपक्षी खेमे के वोटों के बंटवारे की संभावना भी चर्चा में है.
तिरहुत शिक्षक सीट पर भाजपा, जदयू, राजद, कांग्रेस, सीपीआई और जन सुराज के उम्मीदवारों की मौजूदगी ने मुकाबले को बहुकोणीय बना दिया है. यहां कई दलों के प्रत्याशी मैदान में हैं, इसलिए चुनावी तस्वीर को किसी एक मुकाबले तक सीमित करके देखना आसान नहीं होगा.
वोटों का बंटवारा बन सकता है अहम मुद्दा
इन आठ सीटों पर चुनाव के दौरान उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पहचान, समर्थकों की सक्रियता और दलों के बीच तालमेल जैसे पहलू महत्वपूर्ण रहेंगे. खासकर उन सीटों पर स्थिति दिलचस्प होगी, जहां एक ही गठबंधन से जुड़े दलों या असंतुष्ट नेताओं के उम्मीदवार आमने-सामने हैं.
अगर किसी सीट पर समान राजनीतिक आधार वाले उम्मीदवार अलग-अलग चुनाव लड़ते हैं, तो वोट बंटने की स्थिति बन सकती है. हालांकि, इसका वास्तविक असर मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा. जन सुराज और निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका भी इस लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि वे चुनावी मुकाबले में कितने मतदाताओं का समर्थन जुटा पाते हैं.
इसलिए बिहार विधान परिषद का यह चुनाव केवल आठ सीटों पर जीत-हार का मामला नहीं है. इसके जरिए राजनीतिक दलों को अपने संगठन, जमीनी समर्थन और गठबंधन के भीतर आपसी समन्वय को परखने का मौका भी मिलेगा.
कब होगा मतदान और मतगणना?
बिहार विधान परिषद की आठ स्नातक और शिक्षक सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना प्रस्तावित है. इन तारीखों के साथ अब सभी की नजर उम्मीदवारों के प्रदर्शन और चुनावी समीकरणों पर रहेगी. मतदान के बाद ही पता चलेगा कि अलग-अलग उम्मीदवारों की मौजूदगी ने किस सीट पर कितना असर डाला और किस दल को अपने समर्थन का कितना लाभ मिला.
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-भारत एक्सप्रेस
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