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असम-बंगाल तो ठीक, क्या साउथ में चल पाएगा बीजेपी का जादू? जानिए क्या है मोदी-शाह का नया ‘गेम प्लान’

बीजेपी असम और बंगाल में अपनी पैठ मजबूत कर चुकी है, लेकिन असली परीक्षा दक्षिण भारत में है. तमिलनाडु में भ्रष्टाचार और परिवारवाद के खिलाफ मोर्चा खोलना हो या केरल में हिंदू अस्मिता का मुद्दा उठाना, क्या बीजेपी पारंपरिक क्षेत्रीय राजनीति को मात दे पाएगी? देखिए एक विशेष रिपोर्ट.

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BJP Expansion Strategy 2026: पश्चिम बंगाल में घुसपैठ, असम में CAA, केरल में हिंदू अस्मिता और तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति को चुनौती देकर बीजेपी इन राज्यों में पैठ बढ़ाने और जीत हासिल करने की पुरजोर कोशिश कर रही है. असम और बंगाल में यह रणनीति कारगर हो सकती है, लेकिन क्या केरल और तमिलनाडु में पारंपरिक क्षेत्रीय दलों को हराना कड़ी चुनौती हो सकती है, एक रिपोर्ट.

पहचान और विकास का दांव

बिहार जीत के बाद अब असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में बीजेपी अपने आजमाए हुए चुनावी मॉडल और रणनीतियों पर चुनावी मैदान पर उतरती दिखाई दे रही है. असम में BJP की सरकार है और हिमंता बिस्वा सरमा मुख्यमंत्री हैं. शुरुआती विरोध के बाद बीजेपी ने इसे असमिया पहचान और विकास के नैरेटिव से बैलेंस कर लिया, 2021 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनाव में इसका फ़ायदा रहा. ऐसे में एक बार फिर NRC को स्थानीय पहचान की रक्षा के वादे के साथ बीजेपी का चुनावी मैदान में उतरना फायदा पहुंचा सकता है.

द्रविड़ मॉडल बनाम हिंदू अस्मिता

बंगाल में घुसपैठ का मुद्दा असर करता है. बीजेपी ने घुसपैठ का मुद्दा उठाकर ममता सरकार को घेरा और टीएमसी के खिलाफ चार्जशीट में जगह देकर बता दिया कि बीजेपी किस लाइन-लेंथ पर चुनावी बैटिंग कर रही है. वहीं तमिलनाडु दक्षिण में भाजपा के विस्तार में बड़ी बाधा बनकर खड़ा है. लगभग एक दशक से भाजपा के सारे प्रयास विफल साबित हो रहे हैं. ऐसे में तमिलनाडु में बीजेपी ‘द्रविड़ मॉडल’ को भ्रष्टाचार, परिवारवाद और हिंदू विरोधी होने का आरोप लगाकर चुनौती दे रही है. बीजेपी का मुख्य उद्देश्य द्रविड़ राजनीति के विकल्प के रूप में खुद को स्थापित करना है.

केरल में बीजेपी के प्रमुख हिंदू अस्मिता मुद्दे जिनमें मंदिर परंपरा और सांस्कृतिक हस्तक्षेप, जहाँ हिंदू आबादी 48% से अधिक है, जहां 50 वर्षों से हिंदू विधायक न होने का मुद्दा, धर्मांतरण और जनसांख्यिकीय बदलाव के जरिए कांग्रेस-वाम दलों के पारंपरिक द्वंद्व को तोड़कर केरल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है. बावजूद इसके सफलता काफी दूर दिखाई देती है.

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-भारत एक्सप्रेस



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