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‘Seva’ By BJP: PM मोदी के जन्मदिन के मौके पर भाजपा देशभर में मनाएगी ‘सेवा पर्व’, ऐसे बना सुशासन का मॉडल

‘Seva’ By BJP: 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन ‘सेवा पर्व’ के रूप में मना रही है. रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण और ‘नमो युवा रन’ जैसे कार्यक्रमों आयोजित किए जाते हैं.

PM Modi

‘Seva’ By BJP: भारतीय जनता पार्टी (BJP) में हर साल 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक एक खास परंपरा निभाई जाती है. यह वह समय है जब पार्टी अपने सबसे लोकप्रिय चेहरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन किसी भव्य आयोजन या केक काटने से नहीं, बल्कि सेवा कार्यों से मनाती है. पिछले 11 वर्षों से बीजेपी इस कार्यक्रम को ‘सेवा पर्व’ या ‘सेवा पखवाड़ा’ के रूप में पूरे देशभर में चलाती आ रही है. इस दौरान रक्तदान शिविर, अस्पतालों में फल वितरण, सड़क सफाई अभियान और वृक्षारोपण जैसे कार्य किए जाते हैं.

‘सेवा’ को राजनीतिक मंत्र बनाने की कहानी

मोदी अपने राजनीतिक जीवन में लगातार ‘सेवा’ को केंद्रीय विचार के रूप में सामने रखते रहे हैं. यही वजह है कि बीजेपी की जनसंपर्क रणनीति में यह शब्द अहम भूमिका निभाता है. साल 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही मोदी ने ‘सेवा और समर्पण’ और ‘सेवा ही संगठन’ जैसे नारों के जरिए पार्टी की विचारधारा में इसे गहराई से जोड़ा.

खुद मोदी कई बार कह चुके हैं कि सरकार का काम शासन करना नहीं, बल्कि जनता की सेवा करना है. कोविड-19 महामारी के दौरान बीजेपी कार्यकर्ताओं से राशन, दवाइयाँ और मास्क बांटने का जो अभियान चलाया गया था, उसे भी ‘सेवा ही संगठन’ नाम दिया गया.

बीजेपी प्रवक्ता तुहिन सिन्हा का कहना हैं कि ‘मोदी को पहले सुधारक और फिर राजनेता के रूप में देखना चाहिए. चाहे स्वच्छ भारत मिशन हो, बेटी बचाओ अभियान हो या फिर संयुक्त राष्ट्र में उनका रुख—हर पहल के केंद्र में सेवा की सोच ही रही है. वे देश के गरीब तबके से लेकर वैश्विक स्तर पर ग्लोबल साउथ की आवाज़ उठाने तक, हमेशा कमज़ोर वर्गों के पक्षधर बने हैं.’

संघ से लेकर मुख्यमंत्री तक ‘सेवक’ की पहचान

1970-80 के दशक में आरएसएस के प्रचारक के तौर पर मोदी ने देशभर की यात्रा करते हुए ‘राष्ट्र ही मंदिर, सेवा ही पूजा’ का विचार आत्मसात किया. 2001 में जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने, तो खुद को ‘मुख्य सेवक’ कहलाना पसंद किया. 2002 से 2014 के बीच ‘गरीब कल्याण मेला’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए उन्होंने इस ब्रांड को और मजबूत किया. यही पहचान आगे बढ़ी और जब 2014 में वे प्रधानमंत्री बने, तो अपने पहले संबोधन में उन्होंने खुद को ‘प्रधान सेवक’ कहा.

क्यों मनाया जाता है ‘सेवा पर्व’

मोदी के जन्मदिन को अलग अंदाज़ में मनाने के साथ-साथ इस 15 दिनी अभियान का मकसद महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती तक सेवा की परंपरा को जोड़ना भी है. यह कार्यक्रम न सिर्फ नेताओं और कार्यकर्ताओं को जनता तक पहुँचने का मौका देता है, बल्कि चुनावी तैयारी से अलग पार्टी को लगातार सक्रिय भी रखता है. सांसदों, विधायकों से लेकर बूथ स्तर तक, सभी इस सेवा अभियान में शामिल होते हैं.

इस साल क्या खास होगा?

बीजेपी इस बार ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘मेक इन इंडिया’ पर ज़ोर देगी. पार्टी चाहती है कि लोग भारतीय उत्पादों को अपनाएं. हाल ही में मोदी ने कई बार ‘स्वदेशी’ पर बल दिया है, और अब पहली बार भारतीय चिप वाला मोबाइल फोन बाज़ार में आने जा रहा है. इसके साथ ही बीजेपी युवा मोर्चा 75 शहरों में ‘नमो युवा रन’ आयोजित करेगा, जिसमें हर जगह 10,000 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है. इस दौड़ का मुख्य संदेश युवाओं में नशामुक्ति को लेकर होगा.

6 से 10 सितंबर तक ज़िला स्तर पर कार्यशालाएं की गईं और 11 से 13 सितंबर तक मंडल स्तर पर तैयारी बैठकों का आयोजन हुआ. दो चरणों में 1,000 ज़िला अस्पतालों और मंडलों में रक्तदान शिविर लगाए जा रहे हैं. इसके अलावा स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, मंदिरों, पार्कों, नदी तटों और धरोहर स्थलों पर सफाई अभियान भी चलाया जाएगा. पूरा कार्यक्रम 2 अक्टूबर गांधी जयंती के दिन समाप्त होगा.

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-भारत एक्सप्रेस 



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