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आखिर क्यों BMC चुनाव कराने में हुई 4 साल की देरी? ये हैं वो 3 बड़े कारण जिन्होंने थाम दी थी रफ्तार

एशिया की सबसे अमीर महानगरपालिका, BMC, पिछले 4 साल से बिना पार्षदों के चल रही थी. कोर्ट के चक्कर और सियासी खींचतान ने मुंबईकरों का इंतज़ार बढ़ा दिया. यहाँ उन तीन मुख्य कारणों का विश्लेषण है जिन्होंने देश की आर्थिक राजधानी के स्थानीय चुनाव को रोक कर रखा था.

BMC Election Result 2026, Mumbai Civic Polls

BMC Election Results 2026: मुंबई में पिछले कई सालों से जिस घड़ी का इंतजार था, वो आखिरकार आ ही गई. गुरुवार (15 जनवरी) को मुंबई की सड़कों पर एक अलग ही गहमागहमी दिखी, जब देश की सबसे अमीर महानगरपालिका यानी BMC के लिए वोट डाले गए. अब सबकी नजरें आज, यानी शुक्रवार (16 जनवरी) को होने वाली वोटों की गिनती पर टिकी हैं.

इस बार का मुकाबला कोई आम चुनावी लड़ाई नहीं है, बल्कि यह मुंबई के असली ‘किंग’ का फैसला करने वाली जंग है.

227 वार्ड और 1700 दावेदार

मुंबई की 227 सीटों पर कब्जा जमाने के लिए इस बार कुल 1,700 उम्मीदवार मैदान में उतरे हैं. दिलचस्प बात यह है कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है, इस बार 878 महिला उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रही हैं, जबकि पुरुषों की संख्या 822 है.

मुंबई के करीब 1.03 करोड़ मतदाताओं के हाथ में इन उम्मीदवारों का भविष्य है. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, इस भारी-भरकम वोटर लिस्ट में 55 लाख से ज़्यादा पुरुष और 48 लाख से ज़्यादा महिला वोटर शामिल हैं.

आखिर क्यों टलते रहे चुनाव?

2017 के बाद मुंबईकर 2022 में वोट डालने वाले थे, लेकिन मामला खींचता चला गया. इसके पीछे तीन बड़ी वजहें रहीं:

कोरोना महामारी: जब 2022 में चुनाव होने थे, तब देश कोरोना की लहरों से जूझ रहा था, जिसकी वजह से चुनावी प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डालना पड़ा.

OBC आरक्षण का पेंच: मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुँचा. कोर्ट का कहना था कि बिना पुख्ता डेटा के आरक्षण नहीं दिया जा सकता. कानूनी दांव-पेंच और तारीखों के चक्कर में करीब तीन साल तक मुंबई बिना किसी चुने हुए नगर सेवक के, सिर्फ एक एडमिनिस्ट्रेटर के भरोसे चलती रही.

वार्डों की अदला-बदली: पहले की सरकार ने सीटों की संख्या 227 से बढ़ाकर 236 कर दी थी, लेकिन सत्ता बदली तो नई सरकार ने इसे फिर से 227 कर दिया. इस खींचतान ने भी चुनाव में काफी देरी कराई.

आखिरकार अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई और जनवरी 2026 तक हर हाल में चुनाव कराने का आदेश दिया.

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क्या है इस बार का सियासी समीकरण?

बता दें कि 2017 का चुनाव याद करें तो शिवसेना और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर थी. शिवसेना को 84 और बीजेपी को 82 सीटें मिली थीं. तब दोनों साथ थे, लेकिन आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. शिवसेना अब दो फाड़ हो चुकी है और समीकरण पहले जैसे नहीं रहे.

बीजेपी इस बार पूरी ताकत लगा रही है कि वह शिवसेना के इस पुराने किले को ढहाकर अपना पहला मेयर बना सके. वहीं दोनों ही गुटों के लिए यह अस्तित्व की लड़ाई है. कौन सी शिवसेना मुंबई के दिल पर राज करती है, इसका फैसला भी इन्हीं नतीजों से होगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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