खान सर (फाइल फोटो)
Khan Sir on BPSC Exam: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा (CCE) को लेकर छात्रों और शिक्षकों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है. पटना में लगातार विरोध-प्रदर्शन तेज हो रहे हैं, जिसमें अभ्यर्थियों के साथ शिक्षकों की भी अहम भागीदारी देखी जा रही है. इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे चर्चित शिक्षाविद् फैजल खान, जिन्हें लोग खान सर के नाम से जानते हैं, ने परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं को उजागर करते हुए दोबारा परीक्षा कराने की मांग उठाई है.
मीडिया से बातचीत में खान सर ने इस आंदोलन की गैर-राजनीतिक प्रकृति को रेखांकित किया और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व प्रधान सचिव दीपक कुमार से अपील की कि वे परीक्षा की पुनः आयोजन की मांग पर गंभीरता से विचार करें.
खान सर ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हमारी सिर्फ एक मांग है – री-एग्जाम. इससे कम कुछ भी स्वीकार नहीं किया जाएगा.”
17 फरवरी को हुआ विशाल प्रदर्शन
बिहार की राजधानी पटना में 17 फरवरी को हजारों अभ्यर्थियों और शिक्षकों ने एकजुट होकर विरोध मार्च निकाला. यह प्रदर्शन मुल्लाल्लाहपुर से शुरू होकर गर्दनीबाग तक पहुंचा, जहां छात्रों ने हाथों में तख्तियां लेकर परीक्षा रद्द करने और नई परीक्षा आयोजित करने की मांग की.
प्रमाणों के साथ अदालत में छात्र
खान सर ने कहा कि वे पूरी कानूनी प्रक्रिया पर विश्वास रखते हैं और पटना उच्च न्यायालय में सभी आवश्यक सबूत प्रस्तुत किए जा चुके हैं. उन्हें पूरा भरोसा है कि अदालत का निर्णय छात्रों के हित में आएगा.
उन्होंने बताया कि परीक्षा में कई गड़बड़ियां हुईं, जिनमें गया और नवादा कोषागार से प्रश्नपत्रों का गायब होना, परीक्षा केंद्रों पर कुछ अभ्यर्थियों को तय समय से ज्यादा वक्त मिलना, और प्रश्नपत्रों की अनुचित ढंग से हैंडलिंग शामिल हैं.
खान सर ने उठाए गंभीर सवाल
उन्होंने कहा, “परीक्षा के बाद 13 दिसंबर को प्रश्नपत्रों को गया और नवादा के ट्रेजरी में सुरक्षित रखना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.”
इसके अलावा, परीक्षा में अनियमितताओं के चलते 12 हजार अभ्यर्थियों को 4 जनवरी 2025 को दोबारा परीक्षा देनी पड़ी. लेकिन इस पुनर्परीक्षा में भी बीपीएससी पर गंभीर आरोप लगे हैं.
गायब प्रश्नपत्रों का दोबारा इस्तेमाल?
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि नए प्रश्नपत्र तैयार करने के बजाय, बीपीएससी ने 4 जनवरी को आयोजित पुनर्परीक्षा में उन्हीं प्रश्नपत्रों का इस्तेमाल किया, जो नवादा और गया से गायब हुए थे. इसके कारण परीक्षा परिणामों में भारी अंतर देखा गया. 13 दिसंबर की परीक्षा में मात्र 6% अभ्यर्थी सफल हुए थे, जबकि 4 जनवरी की पुनर्परीक्षा में यह संख्या 19% तक पहुंच गई.
री-एग्जाम ही अंतिम समाधान
खान सर ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधान सचिव दीपक कुमार से अपील करते हुए कहा कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से लें और छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए री-एग्जाम कराएं. उन्होंने कहा, “हमारे पास पर्याप्त प्रमाण हैं, और न्यायालय भी इन्हें अनदेखा नहीं कर सकता. मुझे पूरी उम्मीद है कि पटना उच्च न्यायालय छात्रों के हक में फैसला देगा.”
छात्रों और शिक्षकों का यह आंदोलन अब तेज होता जा रहा है और सरकार पर दबाव बढ़ रहा है कि वह इस परीक्षा विवाद को जल्द से जल्द हल करें.
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-भारत एक्सप्रेस
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