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साउथ चाइना सी में ड्रैगन का शिकार करेगा भारत का ‘त्रिशूल’! वियतनाम-इंडोनेशिया से ब्रह्मोस की महा-डील के मायने क्या?

भारत की ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर फिलीपींस के बाद वियतनाम और इंडोनेशिया के साथ संभावित रक्षा सहयोग की चर्चाएं तेज हो गई हैं. रक्षा निर्यात और इंडो-पैसिफिक रणनीति के संदर्भ में इस कदम को क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है…

हिंद-प्रशांत क्षेत्र और दक्षिण चीन सागर में अपनी सैन्य दादागीरी दिखाने वाले चीन को घेरने के लिए भारत ने एक ऐसा अचूक बारूदी चक्रव्यूह (BrahMos Missile Deal Vietnam Indonesia) तैयार कर लिया है, जिससे बीजिंग में हड़कंप मच गया है. दरअसल भारत की सबसे घातक सुपरसोनिक ‘ब्रह्मोस मिसाइल’ अब एशिया में चीन की विस्तारवादी रणनीति के सामने एक अभेद्य सुरक्षा दीवार बनने जा रही है.

बता दें कि भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार के एक बेहद सनसनीखेज बयान से साफ हो गया है कि फिलीपींस को ब्रह्मोस सौंपने के बाद अब भारत ने चीन के दो सबसे बड़े दुश्मनों वियतनाम और इंडोनेशिया की ताकत को कई गुना बढ़ाने की पूरी तैयारी कर ली है. यह केवल एक हथियारों की डील नहीं है बल्कि चीन के घर में घुसकर उसकी नौसेना की घेराबंदी करने का भारत का सबसे बड़ा ‘मास्टरस्ट्रोक’ है.

 

वियतनाम के साथ महा-समझौते पर लग गई मुहर(BrahMos Missile Deal)

भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार ने रक्षा कूटनीति के पन्नों को खोलते हुए बताया कि फिलीपींस के बाद अब वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली की खरीद को लेकर गुप्त समझौते पर हस्ताक्षर भी हो चुके हैं, जिसकी औपचारिक सार्वजनिक घोषणा जल्द ही की जाएगी.

इसके अलावा इंडोनेशिया के साथ भी यह महा-डील अपने आखिरी पड़ाव पर है. गौर करने वाली बात यह है कि वियतनाम का दक्षिण चीन सागर को लेकर और इंडोनेशिया का नातुना द्वीप क्षेत्र को लेकर चीन के साथ बरसों पुराना सीमा विवाद चल रहा है. ऐसे में इन दोनों देशों के हाथों में ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक मिसाइल आने का सीधा मतलब है कि चीन की नौसैनिक हरकतों पर अब भारत के दोस्तों का कड़ा पहरा होगा.

ब्रह्मोस की रफ्तार से कांपेगा बीजिंग

इस रणनीतिक कदम (BrahMos Missile Deal Vietnam Indonesia) का सबसे बड़ा एंगल यह है कि ब्रह्मोस की सुपरसोनिक गति, अचूक मारक क्षमता और जमीन, हवा व समंदर से प्रहार करने की खूबी चीन के लिए काल बन जाएगी. यदि वियतनाम और इंडोनेशिया अपनी समुद्री सीमाओं पर इस मिसाइल को तैनात करते हैं तो पूरा दक्षिण चीन सागर और मलक्का जलडमरूमध्य चीनी युद्धपोतों के लिए ‘डेथ ट्रैप’ (मौत का जाल) बन जाएगा. भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी उन्नत सैन्य तकनीक केवल उन्हीं मित्र राष्ट्रों के साथ साझा करता है जो भरोसेमंद हैं. ASEAN देश भारत के इसी मजबूत सुरक्षा नेटवर्क का मुख्य हिस्सा बन चुके हैं.

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व्यापार नहीं अब सुरक्षा का ‘डॉन’ बना भारत

नई दिल्ली ने इस कदम से बीजिंग को एक कड़ा और सीधा संदेश दे दिया है कि भारत अब केवल आर्थिक गलियारों या व्यापारिक समझौतों तक सीमित रहने वाला देश नहीं है बल्कि वह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की तानाशाही को कुचलने वाला सबसे मजबूत रक्षा स्तंभ बन चुका है.

बता दें कि फिलीपींस, वियतनाम और इंडोनेशिया की सीमाओं पर ब्रह्मोस की यह संभावित तैनाती एशिया में ग्लोबल पावर बैलेंस (शक्ति संतुलन) को पूरी तरह बदल कर रख देगी, जो चीन की समुद्री महत्वाकांक्षाओं को हमेशा के लिए समुद्र में ही दफन करने की ताकत रखती है.

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-भारत एक्सप्रेस



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